उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। इसी क्रम में जनपद अल्मोड़ा के भिकियासैंण क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। 30 दिसंबर 2025 को भिकियासैंण से रामनगर की ओर जा रही एक यात्री बस विनायक क्षेत्र के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा इतना गंभीर था कि देखते ही देखते पूरा इलाका अफरा-तफरी में बदल गया।
प्रारंभिक सूचना के अनुसार बस में लगभग 17 से 18 यात्री सवार थे। दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 से 7 यात्रियों की घटनास्थल पर ही मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई है।
SDRF को मिली सूचना, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही जिला कंट्रोल रूम (DCR) अल्मोड़ा के माध्यम से राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) को तत्काल अलर्ट किया गया। सूचना मिलते ही SDRF की रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों और मेडिकल सपोर्ट के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
पर्वतीय इलाका होने के कारण राहत और बचाव कार्य में कई व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आईं। संकरी सड़कें, गहरी खाई और ठंडा मौसम रेस्क्यू ऑपरेशन को और अधिक कठिन बना रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ राहत कार्य में जुटी हुई है।
हादसे में मृतकों और घायलों की स्थिति
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक दुर्घटना में 6–7 लोगों की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। मृतकों की संख्या में बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि कुछ यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
वहीं अन्य घायल यात्रियों को तत्काल भिकियासैंण के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल प्रशासन द्वारा घायलों के उपचार के लिए आपात व्यवस्था की गई है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किए जाने की तैयारी भी की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने बचाव में निभाई अहम भूमिका
दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर राहत कार्य शुरू किया। कई घायलों को खाई से निकालने में स्थानीय लोगों की भूमिका अहम रही। ग्रामीणों ने न केवल घायलों को प्राथमिक सहायता दी बल्कि प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम को मौके की सटीक जानकारी भी उपलब्ध कराई।
पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसे हादसों के दौरान स्थानीय समुदाय की तत्परता अक्सर कई जानें बचाने में सहायक साबित होती है, और इस घटना में भी वही देखने को मिला।
दुर्घटना का संभावित कारण
हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्राथमिक तौर पर सड़क की स्थिति, मोड़ पर तेज रफ्तार, तकनीकी खराबी या चालक का नियंत्रण खोना संभावित कारणों में शामिल माने जा रहे हैं।
विनायक क्षेत्र की सड़कें पहाड़ी और घुमावदार हैं, जहां थोड़ी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। प्रशासन द्वारा दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभाग सक्रिय हो गए। घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी प्रकार की बाधा न आए और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
प्रशासन द्वारा मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा पर फिर सवाल
यह हादसा एक बार फिर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आए दिन हो रही बस दुर्घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि पहाड़ी मार्गों पर वाहनों की फिटनेस, ड्राइवरों का प्रशिक्षण और सड़क संरचना पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
सर्दियों के मौसम में कोहरा, फिसलन और खराब दृश्यता दुर्घटनाओं के जोखिम को और बढ़ा देती है, जिससे ऐसी घटनाएँ और अधिक घातक हो जाती हैं।
पीड़ित परिवारों में मातम
इस दुर्घटना की खबर फैलते ही मृतकों और घायलों के परिजनों में कोहराम मच गया। अस्पताल और घटनास्थल पर अपने परिजनों की जानकारी लेने के लिए लोग पहुंचने लगे हैं। प्रशासन द्वारा परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
ऐसे हादसे केवल आंकड़े नहीं होते, बल्कि पीछे छूट जाते हैं टूटे हुए परिवार, अधूरे सपने और गहरी पीड़ा।
राहत और बचाव कार्य जारी
SDRF और स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। खाई में गिरे वाहन को निकालने और यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि कोई भी यात्री अंदर फंसा न रह जाए।
स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे-जैसे आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, प्रशासन द्वारा अपडेट साझा किए जाएंगे।
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