नई दिल्ली, 3 फरवरी 2025 – दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की पोती, आराध्या बच्चन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इंटरनेट पर उनके बारे में फैलाई जा रही भ्रामक और झूठी सूचनाओं को लेकर गूगल और अन्य वेबसाइटों को नोटिस जारी किया।
क्या है मामला?
2023 में, आराध्या बच्चन और उनके परिवार ने कुछ यूट्यूब चैनलों और वेबसाइटों के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर आराध्या के स्वास्थ्य से जुड़ी झूठी और भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं, जिसमें यह दावा किया गया कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं या उनका निधन हो गया है।
बच्चन परिवार ने अदालत से अनुरोध किया था कि ऐसी अफवाहें उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं और इन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

न्यायालय की कार्यवाही
सोमवार को न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में आराध्या बच्चन की ओर से उनके वकील ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद गूगल, बॉलीवुड टाइम्स और अन्य वेबसाइटों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि झूठी और भ्रामक खबरें फैलाना एक गंभीर मुद्दा है, विशेष रूप से तब जब यह किसी नाबालिग से जुड़ा हो।
अगली सुनवाई 17 मार्च को
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 मार्च 2025 तय की है। तब तक गूगल और अन्य प्रतिवादियों को अदालत में जवाब दाखिल करना होगा।
बॉलीवुड और कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
बॉलीवुड और कानूनी विशेषज्ञों ने अदालत के इस कदम को एक महत्वपूर्ण निर्णय बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और यूट्यूब जैसे प्लेटफार्मों पर अफवाहों और झूठी खबरों का बढ़ता चलन गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि किस तरह मशहूर हस्तियों और उनके परिवारों को गलत सूचनाओं के चलते मानसिक तनाव झेलना पड़ता है।
बॉलीवुड से जुड़े कुछ सितारों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। एक्टर और आराध्या के पिता अभिषेक बच्चन पहले भी कई बार मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनके परिवार की निजता का सम्मान करने की अपील कर चुके हैं।

क्या कहता है कानून?
भारतीय कानून के तहत आईटी एक्ट 2000 और निजता संरक्षण कानून इस तरह की भ्रामक खबरों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान उपलब्ध कराते हैं। यदि किसी व्यक्ति या वेबसाइट को दोषी पाया जाता है, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
यह मामला केवल आराध्या बच्चन से जुड़ा नहीं है, बल्कि सभी सेलिब्रिटी बच्चों और आम नागरिकों की गोपनीयता और डिजिटल अधिकारों से भी संबंधित है। डिजिटल प्लेटफार्मों पर झूठी खबरें फैलाना न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि मानसिक तनाव भी पैदा करता है।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह कदम इंटरनेट पर भ्रामक खबरों को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। अब सबकी नजरें 17 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि गूगल और अन्य वेबसाइटों को इस मामले में किस तरह की जिम्मेदारी उठानी होगी।
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