मध्य पूर्व की तपती हवाओं में एक ठंडी खबर ने धमाका कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी फैला दी — “ट्रम्प दो हफ्ते में ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई का निर्णय लेंगे, क्योंकि निकट भविष्य में बातचीत की संभावना प्रबल है।”

🚨 लेकिन यह पंक्ति सबसे चौंकाने वाली थी: “Substantial chance of negotiations.”
युद्ध के मोर्चे पर इजराइल अकेला?
यह बयान सीधे-सीधे इजराइल की उम्मीदों पर पानी फेरता दिख रहा है। महीनों से इजराइल ईरान के खिलाफ कूटनीतिक और सैन्य समर्थन के लिए अमेरिका पर दबाव डालता रहा है। डिमोना की सुरक्षा से लेकर गाजा के तनाव तक, इजराइल ने हर मोर्चे पर अमेरिका को साथ खड़ा देखने की अपेक्षा की थी।
लेकिन अब अमेरिका की प्राथमिकता डिप्लोमेसी बनती दिख रही है, वह भी उस समय जब इजराइल ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम के लिए खुलेआम चुनौती दे चुका है।
“Negotiation” — तेल अवीव की नींद उड़ाने वाला शब्द
इजराइल को सबसे अधिक झटका इस शब्द से लगा है — बातचीत। वो ईरान जिसे इजराइल “सर्वोच्च खतरा” मानता है, अब अमेरिका की नजरों में “कूटनीतिक संभावना” बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रम्प की चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। 2024 में ट्रम्प के लिए यह एक “शांतिदूत” की छवि बनाने का अवसर हो सकता है, जहां वो बिना युद्ध के ईरान को कूटनीतिक रूप से साधने का दावा कर सकते हैं।
⏳ दो हफ्ते का अल्टीमेटम — किसके लिए फायदेमंद?
- ईरान के लिए: समय मिला है कि वो अपने टकराव वाले रुख में नरमी लाकर कूटनीतिक जीत हासिल करे।
- अमेरिका के लिए: वो एक बड़ी जंग से बचकर भी वैश्विक शक्ति बना रह सकता है।
- इजराइल के लिए: यह सबसे बड़ा झटका हो सकता है — क्योंकि अब उसे शायद अकेले मैदान में उतरना पड़े।
📉 इजराइली मीडिया में हलचल
इजराइली अखबारों ने इस घोषणा को “अविश्वास का संकेत” बताया है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने इसे “युद्ध का टलना नहीं, बल्कि इजराइल पर दबाव बढ़ने की शुरुआत” माना है।
सिर्फ एक सवाल:
क्या अमेरिका अब युद्ध नहीं, “डील” की भाषा बोलने लगा है? और क्या इजराइल का अगला कदम अकेले आगे बढ़ना होगा?
🔥 यह दो हफ्ते इतिहास बदल सकते हैं… या इजराइल की रणनीति।
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