अब आप देशभर के जलस्रोतों का हाल एक क्लिक में जान सकते हैं. जी हां रुड़की में स्थित NIH (एनआईएच) के वैज्ञानिकों ने ‘ईश्वर’ नाम का एक एप तैयार किया है. जिसकी मदद से ऐसा संभव है. बता दें इस एप को तैयार करने में एक वर्ष से अधिक का समय लगा है.
जल शक्ति मंत्रालय ने दी एप को मंजूरी
दरअसल प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने और पानी कम होने की बातें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इन स्रोतों को लेकर कोई भी आंकड़ा फिलहाल केंद्र सरकार के पास नहीं है. इसी समस्या को लेकर इस एप का अविष्कार किया गया है. इस एप में जल स्रोतों का पूरा हाल दर्ज हो सकेगा. वहीं भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने एनआईएच के इस एप को मंजूरी भी दे दी है. पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस एप की मदद से चार राज्यों का स्रोतों का सर्वे शुरू किया जा रहा है, जिनमें उत्तराखंड समेत ओडिसा, मेघालय और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं.
चार राज्यों में होगा सर्वे शुरू
एनआईएच रुड़की के सेल फॉर स्प्रिंग के प्रभारी वैज्ञानिक एफ डॉ.सोबन सिंह रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि देश में पहली बार जल स्रोतों के सर्वे को लेकर कोई काम हुआ है. पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एप की मदद से उत्तराखंड समेत ओडिसा, मेघालय और हिमाचल प्रदेश के चार राज्यों में स्रोतों का सर्वे शुरू किया जा रहा है. उन्होंने बताया पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश लोग पेयजल के लिए स्रोत यानी स्प्रिंग पर ही निर्भर हैं. डॉ.सोबन सिंह रावत ने के अनुसार क्लाइमेट चेंज से स्रोतों के सूखने या फिर पानी कम होने की बात लगातार सामने आ रही है.
एप को कैसे मिलेगी सारी जानकारी
बता दें सरकार के पास स्रोतों को लेकर कोई सटीक जानकारी नहीं है. यही कारण है कि स्रोतों के उपचार और उनके रिचार्ज को लेकर कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है, अब उम्मीद जताई जा रही है कि ईश्वर एप की मदद से स्रोतों का सर्वे किया जा सकेगा. डॉ.सोबन के अनुसार एप में करीब 22 सूचनाएं फोटो समेत अपलोड करनी हैं. जिसके बाद एप एक के बाद सूचना मांगता जाएगा और सभी सूचनाएं दर्ज करने के बाद स्रोत की जियो टैगिंग की जाएगी. जिसके बाद इसकी मदद से सभी स्रोतों की मॉनिटरिंग आसानी से हो सकेगी.
नैनीताल से होगी इसकी शुरुआत
वहीं ऐसे में अगर कोई स्रोत सूखता है या उसमें पानी कम होता या फिर कुछ समस्या आती है तो उसकी जानकारी आसानी से मिल जाएगी. डॉ सोबन ने बताया कि उत्तराखंड के नैनीताल से इसकी शुरुआत की जा रही है. बता दें अभी जम्मू में तवी नदी के क्षेत्र में एप से सर्वे किया गया है. यहां पर 469 स्रोत की पूरी जानकारी ईश्वर एप पर डाली गई है. हिमाचल के चंबा में 981 जल स्रोतों का सर्वे कर एप पर अपलोड किया गया है. एक क्लिक पर ही इन स्प्रिंग का हाल कहीं भी बैठकर देखा जा सकता है. डॉ सोबन ने बताया कि देशभर के स्प्रिंग या स्रोत एप पर होंगे, इससे पर्वतीय क्षेत्रों का पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी.
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