जब भारतीय क्रिकेट टीम में किसी युवा खिलाड़ी का चयन होता है, तो केवल उसके घर में ही नहीं, बल्कि उसके पूरे राज्य और समाज में उत्साह की लहर दौड़ जाती है। इस बार यह सम्मान उत्तराखंड के लाल अभिमन्यु ईश्वरन को मिला है, जिनका चयन भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम में हुआ है। एक ऐसे राज्य के लिए, जो अभी तक क्रिकेट के राष्ट्रीय मानचित्र पर सीमित ही मौजूद रहा है, यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
देहरादून की गलियों से ड्रेसिंग रूम तक
अभिमन्यु ईश्वरन का जन्म 6 सितंबर 1995 को देहरादून में हुआ। क्रिकेट के प्रति जुनून उन्हें विरासत में मिला — उनके पिता ने उनके क्रिकेट करियर की नींव बचपन में ही रख दी थी। उत्तराखंड में सुविधाओं की सीमितता को समझते हुए उन्होंने अपने बेटे को क्रिकेट की बेहतर ट्रेनिंग के लिए कोलकाता भेजा। वहीं से अभिमन्यु ने बंगाल की रणजी टीम में जगह बनाई और अपनी प्रतिभा को तराशा।
घरेलू क्रिकेट में बना एक मजबूत नाम
पश्चिम बंगाल की टीम के लिए खेलते हुए अभिमन्यु ने लगातार रन बनाए हैं। रणजी ट्रॉफी में उनकी बल्लेबाजी का औसत लगभग 47.49 है और वे अब तक 7,600 से अधिक रन, 27 शतक और 29 अर्धशतक बना चुके हैं। यह आंकड़े उनके धैर्य, तकनीक और मानसिक मजबूती के परिचायक हैं — खासकर तब, जब भारतीय टीम को एक स्थिर और भरोसेमंद ओपनर की आवश्यकता हो।
भारत-ए टीम में कप्तानी और बेहतरीन प्रदर्शन
बांग्लादेश-ए के खिलाफ भारत-ए की कप्तानी करते हुए उन्होंने दो महत्वपूर्ण शतक जड़े — 142 और 157। यह सिर्फ एक बल्लेबाज की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि एक लीडर की परिपक्वता का संकेत भी था। चयनकर्ताओं के लिए यह साफ संकेत था कि अभिमन्यु अब तैयार हैं — न केवल खेलने के लिए, बल्कि अगली पीढ़ी के टेस्ट लीडर बनने के लिए भी।
टेस्ट टीम में वापसी: उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक क्षण
2022 में पहली बार जब उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए टेस्ट टीम में चुना गया, तब उन्हें डेब्यू का मौका नहीं मिला। लेकिन उनकी निरंतर मेहनत और प्रदर्शन ने उन्हें फिर से टीम इंडिया में शामिल करवा दिया। आज, जब वह फिर से टेस्ट टीम का हिस्सा बने हैं, उत्तराखंड के युवाओं के लिए यह किसी प्रेरणा से कम नहीं।
यह चयन सिर्फ अभिमन्यु की जीत नहीं है, यह उन हज़ारों उत्तराखंडी बच्चों की उम्मीदों का जवाब है जो सोचते हैं कि “क्या हम भी एक दिन टीम इंडिया का हिस्सा बन सकते हैं?” अब उत्तराखंड के पास अभिमन्यु के रूप में एक ठोस उदाहरण है — जो दिखाता है कि सीमित संसाधनों और छोटे शहरों से भी बड़ी मंज़िलों तक पहुँचा जा सकता है।
अभिमन्यु: क्रिकेट से परे एक सोच
अभिमन्यु न केवल एक तकनीकी रूप से दक्ष बल्लेबाज हैं, बल्कि मैदान के बाहर भी बेहद अनुशासित और शांत व्यक्तित्व के धनी हैं। सोशल मीडिया से दूर रहना, फिटनेस और ध्यान पर जोर देना — ये सब उन्हें एक परिपक्व खिलाड़ी की श्रेणी में खड़ा करते हैं।
उत्तराखंड के लिए यह एक नई शुरुआत
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में क्रिकेट की संरचना धीरे-धीरे बन रही है, और अभिमन्यु की सफलता इस दिशा में मील का पत्थर है। राज्य सरकार और क्रिकेट एसोसिएशन को अब इस उपलब्धि को एक प्रेरणा बनाकर आगे की योजनाएँ बनानी चाहिए — ताकि अगला अभिमन्यु देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा या पिथौरागढ़ से निकल सके।
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