उत्तराखंड में Freedom of Religion Amendment Bill, 2025 पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल Lt Gen Gurmeet Singh (सेवानिवृत्त) ने यह विधेयक राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। राजभवन की ओर से विधेयक में कुछ तकनीकी आपत्तियां जताई गई हैं, जिन पर पुनर्विचार के निर्देश दिए गए हैं।
🔹 क्यों लौटाया गया विधेयक
सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने विधेयक की भाषा, दंड प्रावधानों की स्पष्टता और कुछ कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर गंभीर मामलों में आजीवन कारावास जैसे कड़े दंड प्रावधानों को लेकर तकनीकी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा आवश्यक बताई गई है।
🔹 विधेयक में क्या था प्रस्ताव
Freedom of Religion Amendment Bill, 2025 के तहत जबरन या प्रलोभन देकर कराए गए धर्मांतरण पर पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव था।
- गंभीर मामलों में आजीवन कारावास
- संगठित धर्मांतरण पर कड़ा दंड
- दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान
सरकार का तर्क था कि यह संशोधन कानून को और प्रभावी बनाएगा, जबकि विपक्ष इसे अत्यधिक कठोर बता रहा था।
🔹 आगे क्या होगा
राज्यपाल द्वारा विधेयक लौटाए जाने के बाद अब राज्य सरकार को इसमें सुझाई गई आपत्तियों पर विचार करना होगा। संशोधन के बाद विधेयक को दोबारा कैबिनेट और फिर विधानसभा में लाया जा सकता है।
🔹 राजनीतिक और सामाजिक असर
इस फैसले को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे सरकार की मंशा पर सवाल उठाने के तौर पर भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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