पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को एक बार फिर इशारों ही इशारों में बहुत बड़ी बात कही दी। राजे ने दो पंक्तियों में अपनी बात कुछ ऐसे कही कि इसे पूर्व सीएम का दर्द समझें या किसी को दी गई सलाह! राजे ने उदयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ‘काश ऐसी बारिश आए, जिसमें अहम डूब जाए, घमंड चूर-चूर हो जाए’। उनके इस बयान के बाद पार्टी में एक बार फिर हलचल मच गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने महोत्सव में यह भी कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत है हिंसा रहित जीवन, लेकिन हिंसा की परिभाषा सिर्फ हथियार से हिंसा करना या किसी को मारना-पीटना ही नहीं, किसी का दिल दुखाना, किसी का दिल तोड़ना, किसी की आत्मा को सताना भी है। उन्होंने कहा कि राजनीति में सबसे बड़ी दौलत जनता का प्यार है, जो उन्हें निरंतर मिल रहा है। जैन धर्म का सिद्धांत जीओ और जीने दो है लेकिन कई लोगों ने इसे उलट दिया है। जीओ और जीने मत दो। यानी खुद तो जीओ लेकिन दूसरों को जीने मत दो। ऐसा करने वाले वाले भले ही थोड़े समय खुश हो जाएं पर वे हमेशा सुखी नहीं रह सकते क्योंकि जैसा बोओगे-वैसा काटोगे।
राजे के इन बयानों को लेकर अब पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। वैसे तो यह संबोधन धर्मसभा में था लेकिन पूर्व सीएम ने राजनीति से इसे जोड़ दिया। राजे की इन बातों के बाद पार्टी के में चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि पूर्व सीएम ने इशारों ही इशारों में किस पर ये कटाक्ष किए हैं। लोकसभा चुनाव के बाद यह दूसरा मौका है जब पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने इस तरह सार्वजनिक रूप से शब्दों के जरिए पहेलियां बुझाई हैं।
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