देश के हर कोने में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा है। कोई इसे सोशल मीडिया पर जाहिर कर रहा है, तो कोई मोर्चे पर जाकर। लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में व्यापारियों ने इस गुस्से को एक अलग ही अंदाज़ में पेश किया है — मिठाइयों के ज़रिये! जी हां, जयपुर की मिठाई दुकानों ने ‘पाक’ शब्द को मिठाइयों से हटाकर पाकिस्तान को एक सख्त और रचनात्मक जवाब दिया है। मिठाई, जो अब तक केवल स्वाद और परंपरा का प्रतीक थी, अब राष्ट्रभक्ति की एक मीठी अभिव्यक्ति बन गई है।
नाम बदलने का संकल्प, पाक को करारा तमाचा
पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक महीना बीत चुका है, लेकिन जन-मानस का ग़ुस्सा आज भी सुलग रहा है। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीमापार साजिशकर्ताओं को जवाब दिया, तो देशवासियों ने भी रोजमर्रा की चीज़ों से पाकिस्तान को आईना दिखाना शुरू कर दिया है। जयपुर के मिठाई व्यापारियों ने वो कर दिखाया, जो अब तक किसी ने नहीं सोचा था — ‘पाक’ शब्द का बहिष्कार।
पारंपरिक मिठाइयाँ जैसे गोंद पाक, मैसूर पाक, अंजीर पाक, मावा पाक, काजू पाक— ये सब अपने स्वाद के लिए जानी जाती थीं। लेकिन इनके नामों में ‘पाक’ शब्द जुड़ा था, जो पाक कला (खाना पकाने की विधि) से लिया गया था। पर अब इस ‘पाक’ शब्द की पहचान दुश्मन देश पाकिस्तान से जुड़ने लगी थी, और यहीं से उठा बदलाव का तूफान।
गोंद पाक बना गोंदश्री, अंजीर पाक बना अंजीर भारत
जयपुर के मिठाई दुकानदारों ने मिठास में भी राष्ट्रभक्ति घोल दी है। अब मैसूर पाक का नाम हो गया है मैसूरश्री, गोंद पाक अब गोंदश्री है, अंजीर पाक बन गया है अंजीर भारत, और फ्रूट पाक को कहा जा रहा है फ्रूट स्पेशल। इस पहल के पीछे नारा साफ है — “अब हमारी मिठाईयों में पाक नहीं, सिर्फ भारत होगा।”
पाक का नाम मिठाई से भी मिटा देंगे!
जयपुर के सांगानेरी गेट पर स्थित मुंबई मिष्ठान भंडार ने इस नाम परिवर्तन की शुरुआत की। दुकान के जीएम विनीत त्रिखा और संगठन पदाधिकारी मेहुल अग्रवाल ने यह फैसला लेकर साफ संदेश दिया — भारत को नुकसान पहुंचाने वाले देश का नाम हमारे स्वाद, हमारी संस्कृति और हमारी परंपरा में जगह नहीं पाएगा।
त्रिखा का कहना था, “हम यह दिखाना चाहते हैं कि जो भारत की ओर आंख उठाकर देखेगा, उसका नाम तक हमारी मिठाईयों से मिटा दिया जाएगा। भारतवासी अब हर माध्यम से जवाब देंगे — चाहे वो सीमा हो या सिवईं।”
ग्राहकों ने कहा – अब पाक नहीं, बस भारत!
इस बदलाव को जयपुर के लोगों ने दिल से अपनाया है। मिठाई प्रेमियों का कहना है कि अब वो किसी ऐसी मिठाई को हाथ नहीं लगाएंगे, जिसमें ‘पाक’ शब्द जुड़ा हो। सोशल मीडिया पर भी इस अभियान को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। देश के अन्य शहरों में भी इस मुहिम को अपनाने की मांग की जा रही है।
नाम बदलने से बदलेगा मनोबल, टूटेगा आतंक का दंभ
कई लोग कह सकते हैं कि नाम बदलने से क्या फर्क पड़ता है? पर नाम प्रतीक होते हैं — पहचान और विचारधारा के। जब एक पूरा शहर यह तय करता है कि उसकी मिठाइयों में भी पाकिस्तान के नाम की कोई जगह नहीं है, तो यह केवल बदलाव नहीं होता, यह एक राष्ट्रवादी घोषणापत्र होता है — हम हर मोर्चे पर तुम्हें बेनकाब करेंगे, चाहे वो भाषा हो, बाजार हो या भारत की मिठास।
जयपुर की यह मीठी मुहिम अब एक आंदोलन बन रही है — एक ऐसा आंदोलन जो दिखा रहा है कि भारत की जनता न सिर्फ गोलियों से बल्कि गुलाब जामुन से भी जवाब देना जानती है।
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