25 साल बाद का भारत: तपिश, तबाही और चेतावनी
कल्पना करें—25 साल बाद भारत की गर्मी 50°C तक पहुँच सकती है। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि IMD और MoES के आधिकारिक आंकड़े बता रहे हैं। असामान्य गर्मी न सिर्फ इंसानों को झुलसा रही होगी, बल्कि हमारे शहर, खेत और जीवन की नींव हिलाने वाली होगी।
सरकारी स्रोत: IMD वार्षिक रिपोर्ट, MoES क्लाइमेट असेसमेंट रिपोर्ट
डूबते महानगर: समुद्र की चपेट में शहर

मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगर—जो आज चमकते हैं—समुद्र की बढ़ती लहरों में समा सकते हैं।
- NCCR की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 6,907 किलोमीटर तटीय क्षेत्र का 33.6% हिस्सा कटाव का शिकार हो चुका है।
- सिर्फ ओडिशा की तटरेखा का 1990–2018 के बीच 25.6% हिस्सा डूब चुका है।
सवाल है—क्या हमारे बच्चों को डूबते शहरों की तस्वीर अपने आँखों से देखनी पड़ेगी?
सरकारी स्रोत: NCCR, MoES
भूखी पीढ़ियाँ: घटती फसलें और संकट

ICAR की NICRA योजना चेतावनी देती है कि खेती और फसल पर संकट बढ़ रहा है:
- जलवायु परिवर्तन के कारण फसल उत्पादन 20% तक घट सकता है।
- सूखा और बाढ़ की बढ़ती घटनाएँ किसानों की मेहनत और हमारी थाली पर सीधा असर डाल रही हैं।
सोचिए—आने वाली पीढ़ियाँ भूखी रह जाएँगी, लेकिन खाना मिलेगा ही नहीं।
सरकारी स्रोत: ICAR, NICRA प्रोजेक्ट
हीटवेव का कहर

MoES की रिपोर्ट बताती है कि अगले 25 साल में हीटवेव:
- 3–4 गुना अधिक तीव्र होंगी।
- औसत अवधि दोगुनी हो जाएगी।
- 2024 के आंकड़े दिखाते हैं कि हीटवेव से मौतें पहले से कई गुना बढ़ रही हैं।
यह सिर्फ तापमान नहीं है—यह स्वास्थ्य और जीवन पर हमला है।
सरकारी स्रोत: MoES, IMD, NDMA
सरकार की तैयारी और वास्तविकता
भारत सरकार ने कई योजनाएँ शुरू की हैं:
- National Action Plan on Climate Change (NAPCC)
- State Action Plans
- NICRA (Climate Resilient Agriculture)
लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इन कदमों से आने वाले 25 साल का संकट पूरी तरह नहीं रोका जा सकता।
सरकारी स्रोत: NAPCC, ICAR रिपोर्ट
सच का सामना: 25 साल बाद भारत
- 50°C की तपिश
- डूबते महानगर
- भूखी पीढ़ियाँ और घटती फसलें
यह चेतावनी नहीं, अलार्म है! आने वाली पीढ़ियों को जलते, डूबते और भूखे भारत का सामना न करना पड़े, इसके लिए हमें अभी जागना होगा।
Amitendra Sharma is a digital news editor and media professional with a strong focus on credible journalism, public-interest reporting, and real-time news coverage. He actively works on delivering accurate, fact-checked, and reader-centric news related to Uttarakhand, governance, weather updates, and socio-political developments.