अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टैरिफ विवाद ने भारतीय सियासत में अप्रत्याशित मोड़ ला दिया है। विपक्ष, जो अब तक किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरता रहा, इस मामले में अचानक रक्षात्मक हो गया है। कारण — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिकी दबाव के खिलाफ लिया गया सख्त और स्पष्ट रुख, जिसे देशभर के किसान नेताओं का समर्थन मिल रहा है।
कभी कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करने वाले गुरनाम सिंह चरुनी ने खुलकर पीएम मोदी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “अमेरिकी टैरिफ के मसले पर प्रधानमंत्री का रुख किसानों के हितों की रक्षा करता है। यह ऐसा कदम है, जिसे राजनीति से ऊपर उठकर सराहना चाहिए।”

टैरिफ विवाद तब उभरा जब अमेरिका ने भारतीय कृषि उत्पादों पर शुल्क बढ़ाने की कोशिश की। जवाब में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा, चाहे सामने कितना भी आर्थिक दबाव क्यों न हो।
चरुनी के बयान के बाद हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के किसान संगठनों ने पीएम मोदी की तारीफ की। सोशल मीडिया से लेकर गांव-गांव तक इस फैसले को किसान हितैषी करार दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ विवाद न सिर्फ किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत करेगा, बल्कि मोदी सरकार को विपक्षी हमलों से एक बड़ी ढाल भी प्रदान करेगा। अब किसान संगठनों के एक बड़े वर्ग का कहना है कि “जब बात खेत और किसान की हो, तो प्रधानमंत्री का साथ देना जरूरी है।”
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