सरकार ने जेलों में बंदी सुधार कमेटी के लिए गठित सलाहकार बोर्ड में भाजपा विधायकों को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत किया है। राज्य की जेलों में बंदी सुधार के लिए गठित इन सलाहकार बोर्डों में सरकारी अधिकारियों के साथ गैर-सरकारी सदस्य भी शामिल होते हैं। गुरुवार को सरकार ने आदेश जारी कर भाजपा विधायकों को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत किया, जो बंदियों की सजा कम करने और समय से पूर्व रिहाई जैसे निर्णयों में अपनी भूमिका निभाएंगे।
बंदी सुधार सलाहकार बोर्ड का मुख्य कार्य बंदियों की सजा में कमी की सिफारिश करना और समय से पहले रिहाई की रिपोर्ट सरकार को देना है। सरकारी अधिकारियों के साथ इन बोर्डों में अब भाजपा विधायकों की राय महत्वपूर्ण होगी। बोर्ड में डिविजनल कमिश्नर, डिस्ट्रिक्ट जज और जेल अधीक्षक सरकारी सदस्य होते हैं जबकि दो गैर-सरकारी सदस्यों के रूप में विधायक या पूर्व विधायकों को नियुक्त किया जाता है।
विवाद और सवाल
यह परंपरा रही है कि सत्ता में आने वाली पार्टी अपने विधायकों को जेलों के सलाहकार बोर्ड में सदस्य बनाती है। पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भी कांग्रेस विधायकों और सांसदों को इस तरह के पद दिए गए थे। जानकारों का मानना है कि भाजपा विधायकों को इस बार यह पद देने से सवाल उठने लगे हैं कि क्या उन्हें सिर्फ झुनझुना थमाया गया है या उनकी भूमिका वास्तव में महत्वपूर्ण होगी? अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा विधायक इस नियुक्ति पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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