नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र पर विदेशी ताकतों की संभावित साजिश का पर्दाफाश होने वाला है! मोदी सरकार अब यह पता लगाएगी कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में हेरफेर करने के लिए USAID द्वारा दी गई 21 मिलियन डॉलर (लगभग 175 करोड़ रुपये) की अवैध सहायता आखिर किसे प्राप्त हुई और इसका इस्तेमाल कैसे हुआ। यह मामला सामने आते ही राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है।

बाइडेन सरकार और ‘डीप स्टेट’ का दखल?
सूत्रों के अनुसार, बाइडेन प्रशासन और अमेरिकी ‘डीप स्टेट’ ने भारतीय चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए मोटी रकम खर्च की। इसके अलावा, बांग्लादेश संकट के दौरान भी 29 मिलियन डॉलर (लगभग 240 करोड़ रुपये) खर्च किए गए थे। सवाल यह है कि यह पैसा किन संगठनों या व्यक्तियों तक पहुँचा और इसका असली मकसद क्या था?

DOGE का बड़ा फैसला – अनुदान रद्द!
इस खुलासे के बाद एलोन मस्क की अगुवाई वाली DOGE (Department of Global Ethics) ने इन संदिग्ध अनुदानों को रद्द करने का फैसला किया। इससे साफ है कि अब अमेरिका में भी इस फंडिंग को लेकर विवाद बढ़ रहा है।
मोदी सरकार की कार्रवाई – दोषियों पर गिरेगी गाज!
सरकार इस मामले में बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। गृहमंत्रालय और खुफिया एजेंसियों को इसकी गहन जांच के आदेश दिए गए हैं। अगर किसी राजनीतिक दल, NGO, या अन्य संस्थाओं की संलिप्तता पाई गई, तो कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
क्या विदेशी ताकतें भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश रच रही थीं?
क्या यह चुनावी दखल भारत की संप्रभुता पर हमला है?
अगले कुछ दिनों में बड़े खुलासे संभव!
देश इस वक्त एक बड़े राजनीतिक तूफान के मुहाने पर खड़ा है – देखना होगा कि जांच के बाद क्या सामने आता है!
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