बर्लिन में संवाद कार्यक्रम के दौरान टिप्पणी
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत की मौजूदा जीएसटी व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज का जीएसटी ढांचा पूरी तरह प्रो-कंज्यूमर और एंटी-प्रोड्यूसर बन चुका है, जिससे देश के छोटे और मध्यम उत्पादकों पर सीधा दबाव पड़ रहा है।
“उत्पादन करने वालों पर सबसे ज्यादा बोझ”
राहुल गांधी के अनुसार वर्तमान जीएसटी सिस्टम में उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत जरूर मिलती है, लेकिन उत्पादन करने वाले वर्ग—खासकर MSME, छोटे व्यापारी और मैन्युफैक्चरर्स—सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि टैक्स स्लैब की जटिलता और अनुपालन का बोझ उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को कमजोर कर रहा है।
सत्ता में आने पर ढांचे में बदलाव का दावा
राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो जीएसटी के मौजूदा ढांचे को पूरी तरह रियलाइंन किया जाएगा। उनका कहना था कि नया ढांचा ऐसा होगा जो उपभोक्ता और उत्पादक—दोनों के हितों में संतुलन बनाए, ताकि रोजगार, निवेश और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।
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अंतरराष्ट्रीय मंच से आर्थिक नीति पर संदेश
बर्लिन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से दिया गया यह बयान कांग्रेस की आर्थिक सोच और भविष्य की नीति दिशा का संकेत माना जा रहा है। राहुल गांधी लगातार विदेशी मंचों पर भारत की आर्थिक नीतियों, रोजगार और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं, जिसे लेकर देश की राजनीति में बहस तेज रहती है।
GST को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी ने जीएसटी को लेकर सवाल खड़े किए हों। इससे पहले भी वे इसे “गैब्बर सिंह टैक्स” कहकर आलोचना कर चुके हैं और इसे छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदायक बता चुके हैं।
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