भारत का ऐतिहासिक उदय: हम अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं!

नई दिल्ली: भारत ने इतिहास रच दिया है! जापान को पीछे छोड़ते हुए अब हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। यह ऐलान खुद नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने किया, जिन्होंने शनिवार को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के बाद यह उपलब्धि साझा की।

सुब्रह्मण्यम ने कहा,

वैश्विक और आर्थिक माहौल भारत के पक्ष में है, और जब मैं बोल रहा हूं, हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है—जो देश के आर्थिक इतिहास का एक अहम मील का पत्थर है।


यह कैसे हुआ?

यह कोई एक रात में मिली सफलता नहीं है। यह उस यात्रा का नतीजा है जो भारत ने पिछले दशक में आर्थिक सुधारों, विकास योजनाओं और डिजिटल क्रांति के सहारे तय की है।

आइए जानें वो मुख्य स्तंभ जिन्होंने इस उपलब्धि की नींव रखी:

1. सेवा क्षेत्र का उछाल:
भारत का IT और सेवाक्षेत्र वैश्विक स्तर पर एक ब्रांड बन चुका है। इस क्षेत्र ने ना केवल विदेशी मुद्रा अर्जित की, बल्कि लाखों युवाओं को रोजगार भी दिया।

2. विनिर्माण में नया जोश:
‘मेक इन इंडिया’, PLI स्कीम जैसी पहलों ने मैन्युफैक्चरिंग को नई गति दी। देश अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, एक उत्पादक राष्ट्र भी बनता जा रहा है।

3. उपभोक्ता मांग में तेजी:
भारत की युवा और आकांक्षी आबादी ने घरेलू मांग को ऊंचा रखा है, जो आर्थिक ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बन गया है।

4. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI):
विश्व अब भारत को निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद गंतव्य मान रहा है। लगातार बढ़ता हुआ एफडीआई इसका प्रमाण है।


जापान को पछाड़ना: एक वैश्विक संकेत

जापान, जो दशकों से तकनीक और आर्थिक स्थिरता का प्रतीक रहा है, उसे पीछे छोड़ना सिर्फ एक सांख्यिकीय तथ्य नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति का प्रतीक है।

भारत ने यह दिखा दिया है कि वह अब केवल उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि ग्लोबल इकनॉमिक सुपरपावर बनने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।


आगे क्या? चुनौतियां और अवसर

हर उपलब्धि के साथ जिम्मेदारियां आती हैं। यह मुकाम भी कई नई चुनौतियों और संभावनाओं के द्वार खोलता है।

चुनौतियां:

  • आर्थिक असमानता को कम करना
  • गुणवत्ता युक्त शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना
  • सतत रोजगार सृजन
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना

अवसर:

  • दुनिया की सबसे युवा जनसंख्या
  • तेजी से बढ़ती डिजिटल समझ
  • मजबूत लोकतांत्रिक संस्थान
  • ग्रीन एनर्जी और स्टार्टअप इनोवेशन की अपार संभावनाएं

यह सिर्फ एक संख्या नहीं है…

…यह 135 करोड़ भारतीयों की मेहनत, विश्वास और आकांक्षाओं का फल है।

भारत की यह छलांग एक नया आत्मविश्वास जगाती है। यह बताती है कि ‘अब हम केवल सुनने वाले नहीं, दिशा तय करने वाले हैं।’

यह गर्व का क्षण है। यह भारत का क्षण है।

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