उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद से यह पद खाली है, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। अब सबकी निगाहें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDI ब्लॉक) पर टिकी हैं।
NDA ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए उम्मीदवार चुनने का अधिकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपा है। यह कदम बताता है कि NDA पूरी तरह से सोच-समझकर और रणनीतिक रूप से अपना अगला कदम उठाना चाहता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NDA एक ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारेगा जो न केवल राजनीतिक रूप से अनुभवी हो, बल्कि विपक्ष के साथ सदन में सामंजस्य बिठाने की क्षमता भी रखता हो।
पावर कॉरिडोर की चर्चा में कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व राज्यपालों के नाम हैं, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।
दूसरी ओर, INDI ब्लॉक के लिए अपनी एकजुटता दिखाने के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। अब गठबंधन के सभी घटक दलों को एक साझा उम्मीदवार पर सहमत होना होगा, जो कि आसान नहीं है। हालांकि, विपक्षी दल एकजुटता दिखाने के लिए एक मजबूत चेहरा उतारने की कोशिश में हैं। उनका लक्ष्य भले ही जीत सुनिश्चित करना न हो, लेकिन सदन में अपनी उपस्थिति और राजनीतिक ताकत का एहसास कराना जरूर होगा।
उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है। ऐसे में, दोनों ही गठबंधन अपने उम्मीदवारों के नाम किसी भी समय घोषित कर सकते हैं।
हालांकि उपराष्ट्रपति का चुनाव अक्सर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में जाता है, क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में उनके पास संख्या बल अधिक होता है।
बता दें कि यह चुनाव एक प्रतीकात्मक लड़ाई के रूप में महत्वपूर्ण है, जो आने वाले समय में देश की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा चेहरा इस महत्वपूर्ण पद की दौड़ में बाजी मारता है। NDA और INDI ब्लॉक जल्द ही अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने वाले हैं।
देर रात या कल तक भाजपा अपने उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है, वहीं विपक्ष कड़ी चुनौती देने के लिए कुछ समय ले सकता है।
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