जयपुर से विशेष रिपोर्ट
जयपुर। वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र मोहन शर्मा की बहुचर्चित पुस्तक “रजवाड़ों के जांबाज” का भव्य लोकार्पण समारोह रविवार को जयपुर में स्वरांजली संस्थान के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। समारोह में देश की ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक अस्मिता को लेकर गहन विचार विमर्श हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात साहित्यकार प्रदीप सैनी ने कहा, “राजस्थान की रेत के हर कण में भक्ति है और रक्त की हर बूंद में देशभक्ति। हमारे वीर राजाओं और रणबांकुरों ने जिस तरह मुगल आक्रांताओं को परास्त किया, वह भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। यह पुस्तक नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का माध्यम बनेगी।”
दिल्ली से प्रकाशित इस पुस्तक को “राष्ट्रभक्ति का दस्तावेज़” बताते हुए उन्होंने कहा कि “इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। झूठे नायकों के नाम पर युवाओं को गुमराह करने का षड्यंत्र अब नहीं चलने वाला।”
इस अवसर पर इतिहासकार डॉ. एम.एम. शर्मा ने वामपंथी इतिहासकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “मुगलों को महान साबित करने के लिए हमारे असली नायकों को या तो भुला दिया गया या विकृत रूप में पेश किया गया। राजेन्द्र मोहन शर्मा की यह पुस्तक उस ऐतिहासिक अन्याय का उत्तर है।”
लेखक राजेन्द्र मोहन शर्मा ने कहा कि “यह पुस्तक बलिदानी योद्धाओं को समर्पित एक श्रद्धांजलि है। भरतपुर के महाराजा सूरजमल जैसे युगपुरुषों को गलत ढंग से चित्रित करना इतिहास से विश्वासघात है। इस पुस्तक के माध्यम से हमने उस सत्य को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध चिंतक पं. प्यारे मोहन शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि “ऐसी राष्ट्रप्रेरक पुस्तकों को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि बच्चों को अपने असली नायकों से परिचय हो।”
इस अवसर पर डॉ. आलोक व्यास, डॉ. धैर्य व्यास, प्रो. योगेन्द्र मोहन, डॉ. एन.एम. शर्मा, श्रीमती सरोज, श्रीमती रंजना और तारा शर्मा सहित कई गणमान्यजनों ने अपने विचार साझा किए।
समारोह का संचालन दिनेश शर्मा सुजानगढ़िया ने किया।
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