दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी की दशा सुधारने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। छठ घाट से शुरू हुए इस व्यापक सफाई अभियान ने गति पकड़ ली है और सरकार का दावा है कि अगले तीन सालों में यमुना को पूर्ण रूप से बहाल कर दिया जाएगा।

यमुना सफाई का मेगा अभियान शुरू
छठ घाट से शुरू हुए इस सफाई अभियान में कई आधुनिक मशीनें तैनात की गई हैं। नदी से कचरा हटाने के लिए अत्याधुनिक मशीनें, खरपतवार हटाने वाली विशेष मशीनें और ड्रेज यूटिलिटी क्राफ्ट तैनात किए गए हैं। इन मशीनों के जरिए नदी की गहराई में जमी गंदगी और मलवा हटाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल जल की गुणवत्ता में सुधार करेगी, बल्कि नदी के आसपास के पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाएगी।
मोदी की गारंटी पर जनता को भरोसा
दिल्ली में हर राजनीतिक दल ने यमुना की सफाई का वादा किया था, लेकिन जनता का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पर ही टिका हुआ है। लोगों को उम्मीद है कि जिस तरह से केंद्र सरकार ने ‘नमामि गंगे’ अभियान के तहत गंगा नदी की सफाई का अभियान सफलतापूर्वक चलाया, उसी तरह यमुना को भी निर्मल किया जाएगा।
खूबसूरत रिवरफ्रंट का निर्माण होगा
बीजेपी सरकार न केवल यमुना की सफाई कर रही है, बल्कि इसे पर्यटन के लिए भी आकर्षक बनाने की योजना बना रही है। सरकार की योजना के तहत दिल्ली में एक भव्य रिवरफ्रंट विकसित किया जाएगा, जहां लोग सैर-सपाटा कर सकेंगे। इस रिवरफ्रंट पर वॉकवे, साइकिल ट्रैक, बोटिंग सुविधाएं और सुंदर गार्डन बनाए जाएंगे, जिससे दिल्लीवासियों को गंगा घाट जैसी अनुभूति होगी।
तीन साल में यमुना होगी साफ़!
सरकार का दावा है कि अगले तीन सालों में यमुना को पूरी तरह से साफ कर दिया जाएगा। इस अभियान के तहत नदी में गिरने वाले गंदे नालों को रोका जाएगा, जलशोधन संयंत्र (STP) को प्रभावी रूप से चलाया जाएगा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे। साथ ही, औद्योगिक कचरे और घरेलू गंदगी को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।
क्या वाकई सफल होगा यह अभियान?
इससे पहले भी कई सरकारों ने यमुना को स्वच्छ करने के वादे किए, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई खास बदलाव नहीं आया। हालांकि, इस बार जिस पैमाने पर अभियान शुरू हुआ है और जिस प्रकार केंद्र सरकार की सक्रियता दिख रही है, उससे लोगों को उम्मीद जगी है कि यह सफाई अभियान महज चुनावी वादा नहीं बल्कि वास्तविक बदलाव लेकर आएगा।
अगर यह अभियान सफल रहा, तो दिल्ली के लोगों को न केवल साफ़ यमुना मिलेगी, बल्कि यह शहर की जल आपूर्ति और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। अब देखना यह होगा कि मोदी सरकार अपने इस वादे को किस हद तक पूरा कर पाती है।
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