भारतीय खेल जगत में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने खेल प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष डॉ. पी.टी. उषा ने इस चौंकाने वाले मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय खेलों में ताइक्वांडो मुकाबलों के नतीजे पहले से ही तय करने की साजिश का खुलासा हुआ है। PMC समिति की जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने खिलाड़ियों से स्वर्ण पदक के लिए ₹3 लाख, रजत के लिए ₹2 लाख और कांस्य पदक के लिए ₹1 लाख तक की मांग की थी।

खेलों की निष्पक्षता पर गहरा सवाल
PMC समिति की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 16 में से 10 भार वर्गों के विजेताओं को पहले ही तय कर लिया गया था। यानी, खिलाड़ियों के कौशल और मेहनत की कोई अहमियत नहीं रही, बल्कि पदक केवल धन के बल पर दिए जा रहे थे।
IOA की सख्त कार्रवाई, PT उषा ने दिया बड़ा बयान
IOA अध्यक्ष डॉ. पी.टी. उषा ने इस पूरे प्रकरण पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह चौंकाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय खेलों में पदक मैदान के बाहर ही तय किए जा रहे थे। IOA एथलीटों के साथ न्याय करने और खेलों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”
PMC समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार प्रमुख सिफारिशें दी हैं:
- प्रतियोगिता निदेशक को तुरंत बदला जाए और GTCC की सलाह से नया अधिकारी नियुक्त किया जाए।
- 50% से अधिक तकनीकी अधिकारियों को हटाकर प्रमाणित अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
- पूरी प्रतियोगिता की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए और फुटेज को संरक्षित रखा जाए।
- GTCC द्वारा नियुक्त टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान मौजूद रहे ताकि हेरफेर की संभावना खत्म हो।
ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया की भूमिका पर उठ रहा है। आखिर कैसे उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी इस तरह के घोटाले में शामिल हुए? अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय खेलों के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
क्या होगा आगे?
IOA की ओर से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। इस घोटाले में शामिल अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, और ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के कुछ पदाधिकारियों को भी अपने पद से हटाया जा सकता है।
राष्ट्रीय खेलों में इस तरह की धांधली न केवल खिलाड़ियों के सपनों के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह पूरे खेल तंत्र की साख पर भी सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि IOA और खेल मंत्रालय इस मामले में कितनी सख्त कार्रवाई करते हैं।
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