दो लोकसभा चुनाव से सूखा झेल रही कांग्रेस के सामने आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में अपने मत प्रतिशत बढ़ाने (40 तक) ले जाने की चुनौती है। राज्य गठन के बाद वर्ष 2004 में हुए पहले के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 38.31 प्रतिशत मत के साथ नैनीताल सीट पर जीत दर्ज की थी।
तब भाजपा महज दो प्रतिशत अधिक वोट जुटाकर तीन सीट जीतने में कामयाब हुई थी, जबकि एक सीट सपा को मिली थी। कांग्रेस व भाजपा में महज दो प्रतिशत मतों के अंतर के बावजूद जीत में ये अंतर, तब सपा-बसपा को मिले करीब 15 मतों के कारण पैदा हुआ था।
इसके बाद 2009 में कांग्रेस मत प्रतिशत को 43.14 तक ले जाते हुए, राज्य की सभी सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की। यह पार्टी का सभी चुनावों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ मत प्रतिशत रहा। अब कांग्रेस बीते दो चुनावों में खाता भी नहीं खोल पा रही है।
बसपा का वोट बैंक भाजपा के पाले में
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वर्ष 2009 वाले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में बसपा को मिले 15.24 मतों का भी योगदान नजर आता है। इस तरह मत विभाजन की स्थिति में कांग्रेस 43.14 मतों के साथ सभी सीटों पर जीतने में कामयाब रही।
इसके बाद लगातार दो चुनावों में बसपा का मत प्रतिशत पांच प्रतिशत भी नहीं छू पा रहा है। इससे कांग्रेस को मत विभाजन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उधर, बसपा का वोट बैंक सीधे तौर पर भाजपा की ओर शिफ्ट होने से भाजपा-कांग्रेस के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में यह अंतर 30 प्रतिशत को छू चुका है।
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