प्रयागराज, 12 जनवरी 2025:
महाकुंभ-2025 के शुभारंभ से पहले, विदेशी संतों का एक बड़ा समूह प्रयागराज पहुंच चुका है। विभिन्न देशों से आए इन संतों ने महाकुंभ के पवित्र वातावरण में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इनका स्वागत भव्य तरीके से किया गया, जिसमें गंगा घाट पर पारंपरिक वेशभूषा, मंत्रोच्चार और संगीत की धुनें शामिल थीं।
देखें वीडियो: विदेशी संतों की यात्रा
विदेशी संतों का यह आगमन सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में देखा जा सकता है कि विभिन्न देशों के ये संत पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर प्रयागराज के ऐतिहासिक घाटों पर पहुंचे। वे गंगा आरती में भाग लेते हुए और अपने अनुभव साझा करते हुए नजर आए।
आध्यात्मिकता का वैश्विक स्वरूप
विदेशी संतों ने बताया कि वे महाकुंभ के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से प्रभावित होकर यहां आए हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति को गहराई से समझना और इसे विश्वभर में फैलाना है। उनका मानना है कि महाकुंभ न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह मानवता को एकता और शांति का संदेश देता है।
प्रयागराज में उत्साह
स्थानीय श्रद्धालु और साधु-संत विदेशी संतों के साथ संवाद करते हुए देखे गए। इस अद्भुत मिलन ने महाकुंभ के वातावरण को और भी रंगीन बना दिया है। प्रशासन ने उनकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की है।
संदेश और प्रभाव
महाकुंभ-2025 में विदेशी संतों का आगमन भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। वे इस आयोजन के दौरान अपने अनुभव साझा करेंगे और विभिन्न साधना विधियों पर प्रकाश डालेंगे।
वीडियो में यह दृश्य महाकुंभ की आध्यात्मिक महत्ता और सांस्कृतिक विविधता को जीवंत करता है। महाकुंभ-2025 निश्चित रूप से केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा बनेगा।
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