हरियाली की ओर आंगनवाड़ी की उड़ान: विश्व पर्यावरण दिवस पर 20,000 केंद्रों में एक साथ पौधरोपण अभियान!

देहरादून, 5 जून 2025

उत्तराखण्ड की धरती आज कुछ अधिक हरी हुई, कुछ अधिक मुस्कुराई। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार ने एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल करते हुए राज्य भर के लगभग 20,000 आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ पौधरोपण अभियान चलाया। इस राज्यव्यापी हरित संकल्प ने न सिर्फ आंगनवाड़ी परिसरों को सजाया, बल्कि छोटे बच्चों के मन में प्रकृति प्रेम की कोमल जड़ें भी रोप दीं।

 

🌿 बचपन से ही बोया गया पर्यावरण प्रेम का बीज

IMG 20250605 WA0252

यह अभियान सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था — बल्कि एक जागरूक प्रयास था कि बचपन में ही बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाया जाए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, माताओं और स्थानीय समुदाय के लोगों ने मिलकर अपने-अपने क्षेत्रों में फलदार, छायादार और औषधीय पौधों का रोपण किया।

पपीता, नींबू, आँवला, तुलसी, नीम, पीपल जैसे पौधों को प्राथमिकता दी गई, जो न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा करेंगे बल्कि स्वास्थ्य और पोषण के प्राकृतिक स्रोत भी बनेंगे।

🗣️ मंत्री रेखा आर्या का संदेश – “हर हाथ एक पौधा”

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा —

“पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी नीति नहीं, समाज के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। आज आंगनवाड़ी केंद्रों ने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक सहभागिता से बड़े बदलाव संभव हैं।”

उन्होंने इस कार्यक्रम को एक “हरित क्रांति की नन्ही शुरुआत” बताया, जो आने वाले वर्षों में पूरे प्रदेश की जलवायु और सामाजिक चेतना को नई दिशा दे सकती है।

📋 दायित्व और निगरानी: जिम्मेदारी के साथ हरियाली

विभागीय निदेशक श्री प्रशांत आर्य ने जानकारी दी कि हर आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता को इन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है और उनकी सतत निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी। यह सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि स्थायी हरित परिवर्तन की प्रक्रिया है।

साथ ही यह भी तय किया गया है कि हर 15 दिन में एक फीडबैक रिपोर्ट ली जाएगी जिससे पौधों के विकास की स्थिति और संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों की समीक्षा की जा सके।

IMG 20250605 WA0258

🤝 संकल्प और सहभागिता – एक हरित भविष्य की ओर

कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली और यह संकल्प दोहराया कि वे हर वर्ष और हर अवसर पर प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाते रहेंगे।

यह आयोजन एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि जब प्रशासन, समाज और बच्चों की मासूम ऊर्जा एक साथ मिलती है, तो बदलाव केवल कल्पना नहीं, वास्तविकता बन जाता है।


उत्तराखण्ड की नन्ही टहनियों में आज भविष्य की हरियाली लहराई है।
आंगनवाड़ी केंद्र अब सिर्फ शिक्षा और पोषण के स्थान नहीं, प्रकृति से जुड़ाव की पाठशाला बन चुके हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *