हिंदू संप्रदाय के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार में से एक होली का त्यौहार आ चुका है और इसकी शुरुआत होलिका दहन के साथ होगी और होलिका दहन के बाद होली खेली जाएगी. लेकिन इस बार होलिका दहन को लेकर शुभ मुहूर्त कुछ समय के लिए ही है, ना तो इसके पहले और ना ही इसके बाद होलिका दहन की जा सकती है. बता दें कि इसके अलावा भद्राकाल चल रहा है, जिसमें होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है.
होलिका दहन को लेकर मान्यता है कि होलिका दहन के साथ बुराइयों का नाश हो जाता है. इसलिए होलिका दहन की तैयारी में हर कोई जुट जाता है. होलिका दहन में ज्यादातर लोग इसके शुभ मुहूर्त को लेकर असमंजस में रहते हैं. ऐसे में इस बार होलिका दहन के दिन मृत्यु काल भद्रा होने की वजह से कुछ समय के लिए ही होलिका दहन किया जा सकता है. ऐसे में इसका शुभ मुहूर्त रात 11:14 से लेकर 12:29 तक हैं.
सही समय में करें होलिका दहन
इस बार होलिका दहन के दिन भद्राकाल लग रहा है. भद्राकाल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य, पूजा पाठ, होम जप, हवन इत्यादि नहीं किया जाता है. भद्रा काल में सारे काम करना वर्जित माना गया है.
ऐसे में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11:14 से लेकर 12:29 तक है. साथ ही होली पर करीब 500 साल बाद 6 विशेष योग बन रहे हैं. वृद्धि योग, रवि योग, बुधादित्य योग, धन शक्ति योग, त्रिग्रही योग व सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे इन 6 विशेष योगों में होलिका दहन का पर्व मनाया जाएगा.
होलिका दहन पर 24 मार्च को अशुभ मानी गई भद्रा का साया रहेगा. लेकिन अच्छी बात यह है कि यह रात 11 बजकर 14 मिनट तक ही रहेगा. इसके बाद होलिका दहन किया जा सकेगा. 25 मार्च को धुलंडी पर होली खेली जाएगी.
24 मार्च को भद्रा सुबह 9 बजकर 56 मिनट से आरंभ होगी, जो रात 11 बजकर 14 मिनट तक रहेगी. भद्रा का विशेष प्रभाव शाम 6 बजकर 33 मिनट से रात 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. भद्रा काल में होलिका दहन करना अशुभ माना गया है.
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