उत्तराखंड मौसम अलर्ट: 5 दिन भारी बारिश, बिजली का बड़ा खतरा

देहरादून, 18 अगस्त 2026। उत्तराखंड मौसम अलर्ट: उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 18 अगस्त 2026 को जारी ताजा पूर्वानुमान और चेतावनी में राज्य के लिए अगले पांच दिनों तक बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां जारी रहने की संभावना जताई है। सबसे ज्यादा चिंता 18 और 19 अगस्त को लेकर है, जब कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत तीव्र बारिश के दौर की संभावना है।

IMD के जिला-स्तरीय पूर्वानुमान के मुताबिक 18 अगस्त को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधम सिंह नगर में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधम सिंह नगर में गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने तथा बारिश के अत्यंत तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर की आशंका भी जताई गई है।

19 अगस्त को भी मौसम की सक्रियता कम होने वाली नहीं है। इस दिन देहरादून और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है, जबकि टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, चंपावत, पिथौरागढ़, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। शेष जिलों में भी गरज-चमक के साथ तेज से बहुत तेज बारिश के दौर की संभावना बनी हुई है।

उत्तराखंड मौसम अलर्ट

18 अगस्त को इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा

18 अगस्त की चेतावनी में मौसम विभाग ने विशेष रूप से देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधम सिंह नगर को चिन्हित किया है। इन जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली और बहुत तीव्र से अत्यंत तीव्र बारिश का दौर भी आ सकता है।

देहरादून और आसपास के पर्वतीय इलाकों में लगातार बारिश होने की स्थिति में नालों और छोटी नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी और चट्टानों के खिसकने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों को मौसम की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर नजर रखना जरूरी होगा।

मौसम विभाग की जिला-स्तरीय चेतावनी में शेष जिलों के लिए भी गरज के साथ आकाशीय बिजली और तीव्र से अत्यंत तीव्र बारिश के दौर की संभावना जताई गई है। यानी पूरे राज्य में मौसम को सामान्य मानकर चलना जोखिम भरा हो सकता है।

19 अगस्त को देहरादून-बागेश्वर पर खास नजर

19 अगस्त को मौसम का सबसे ज्यादा प्रभाव देहरादून और बागेश्वर में देखने को मिल सकता है। IMD ने इन दोनों जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।

इसके अलावा टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, चंपावत, पिथौरागढ़, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में भी भारी बारिश की संभावना है। मैदानी इलाकों में बारिश के कारण जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है, जबकि पर्वतीय जिलों में भूस्खलन और सड़क अवरोध की आशंका अधिक रहती है।

इस दौरान आकाशीय बिजली को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत होगी। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में गरज के साथ बिजली चमकने और तेज से अत्यंत तीव्र बारिश के दौर की संभावना जताई है।

20 अगस्त को भी बारिश से राहत नहीं

20 अगस्त को बारिश का असर कुछ जिलों में केंद्रित रह सकता है। IMD के अनुसार रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल और देहरादून में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।

पर्वतीय जिलों में गरज-चमक के साथ तीव्र से बहुत तीव्र बारिश का दौर हो सकता है। वहीं राज्य के मैदानी जिलों में भी कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना बनी हुई है।

यह स्थिति खासतौर पर उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है जहां पहले से मिट्टी कमजोर है या सड़कें बारिश के कारण प्रभावित हो चुकी हैं। लगातार कई दिनों तक बारिश होने पर छोटे भूस्खलन भी बड़े सड़क अवरोध में बदल सकते हैं।

21 अगस्त को इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

21 अगस्त के लिए मौसम विभाग ने टिहरी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल और देहरादून में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है।

इसके अलावा राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

22 अगस्त को बदलेगा फोकस, इन जिलों पर नजर

22 अगस्त को मौसम विभाग के पूर्वानुमान में रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

यानी पांच दिन के पूर्वानुमान में बारिश का प्रभाव लगातार अलग-अलग जिलों में बना रहने वाला है। 18 और 19 अगस्त को जहां देहरादून तथा कुमाऊं के कुछ जिलों में ज्यादा सक्रियता है, वहीं 22 अगस्त को गढ़वाल के ऊंचाई वाले जिलों में भारी बारिश का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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अगले पांच दिन पूरे उत्तराखंड में कैसा रहेगा मौसम?

IMD के राज्य स्तरीय पूर्वानुमान के अनुसार 18 से 22 अगस्त तक उत्तराखंड में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तीव्र से अत्यंत तीव्र बारिश के दौर की संभावना बनी हुई है। 18 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत तीव्र बारिश का दौर संभव है, जबकि 19 से 22 अगस्त तक भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

इसका मतलब यह है कि मौसम एक-दो घंटे की बारिश तक सीमित नहीं रहेगा। अलग-अलग जिलों में अलग-अलग समय पर तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। इसलिए किसी एक स्थान पर मौसम साफ होने का अर्थ यह नहीं होगा कि पूरे जिले या पूरे राज्य में मौसम सामान्य हो गया है।

भूस्खलन और सड़क बंद होने का खतरा

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में लगातार तेज बारिश का सबसे बड़ा असर सड़क नेटवर्क पर पड़ता है। IMD की जिला-स्तरीय सलाह में संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़क/राजमार्ग अवरुद्ध होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने को कहा गया है।

भारी बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों के पास यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। छोटे नाले और गदेरे अचानक उफान पर आ सकते हैं। कई बार बारिश किसी एक स्थान पर कम होती है, लेकिन ऊपर के कैचमेंट क्षेत्र में तेज बारिश के कारण नीचे के इलाके में अचानक पानी बढ़ जाता है।

इसी वजह से नदी, नाले और बरसाती धाराओं के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

चारधाम और पर्यटन यात्रा पर भी असर

अगले कुछ दिनों में चारधाम और अन्य पर्वतीय पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की स्थिति को प्राथमिकता देनी होगी। IMD की सलाह के अनुसार लगातार या भारी बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है।

भारी बारिश के दौरान यात्रा केवल आवश्यकता होने पर करने, सक्रिय भूस्खलन वाले क्षेत्र को पार न करने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है। मौसम खराब होने पर यात्रा को कुछ समय के लिए रोकना किसी भी जोखिम को लेने से बेहतर विकल्प हो सकता है।

बिजली गिरने के दौरान क्या सावधानी बरतें?

18 से 22 अगस्त के दौरान कई जिलों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, खेत, ऊंचे पेड़, पहाड़ी चोटियां और अकेले खड़े ढांचे जोखिम बढ़ा सकते हैं।

मौसम विभाग की सलाह के अनुसार गरज-चमक के दौरान सुरक्षित पक्के भवन के भीतर रहना बेहतर है। बिजली चमकने के समय पेड़ के नीचे शरण लेने से बचना चाहिए। बाहर मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए और अनावश्यक रूप से खुले क्षेत्र में नहीं रुकना चाहिए।

पशुपालकों को भी गरज-चमक के दौरान पशुओं को खुले स्थान में बांधकर न रखने की सलाह दी गई है।

नदियों और बरसाती नालों से रहें दूर

भारी बारिश के दौरान नदी और नाले सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। पानी सामान्य दिखाई देने के बावजूद कुछ ही समय में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।

इसलिए:

  • उफनते नाले या नदी को पैदल पार करने की कोशिश न करें।
  • वाहन से भी जलभराव वाले रास्ते को पार करने से बचें।
  • नदी किनारे camping या पिकनिक से बचें।
  • बच्चों और बुजुर्गों को बरसाती धाराओं से दूर रखें।
  • तेज बारिश के दौरान पुलों और रपटों पर विशेष सावधानी बरतें।

IMD की सलाह में भी भारी बारिश के दौरान बाढ़ और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया है।

फ्लैश फ्लड रिस्क में क्या स्थिति?

18 अगस्त को जारी Flash Flood Risk (FFR) बुलेटिन में उत्तराखंड के लिए Area of Concern: NIL दर्ज किया गया है। इसका अर्थ है कि उस बुलेटिन के समय उत्तराखंड में कोई विशेष क्षेत्र फ्लैश फ्लड चिंता क्षेत्र के रूप में चिन्हित नहीं था।

हालांकि इसे मौसम पूरी तरह सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। राज्य में 18 से 22 अगस्त तक भारी बारिश के दौर की चेतावनी जारी है और स्थानीय स्तर पर तेज बहाव, नालों के उफान तथा जलभराव जैसी स्थितियां बारिश की तीव्रता और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती हैं।

तापमान में भी रहेगा बदलाव

IMD के 18 अगस्त को जारी सात दिवसीय जिला-स्तरीय पूर्वानुमान के अनुसार पिछले 24 घंटों में उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम से सामान्य से अधिक के बीच रहा, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य से कम से सामान्य के आसपास रहा।

अगले दिनों में बारिश और बादल छाए रहने के कारण कई इलाकों में तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

प्रशासन और आम लोगों के लिए अहम संदेश

उत्तराखंड में 18 से 22 अगस्त के बीच मौसम का यह दौर खास तौर पर पर्वतीय जिलों के लिए महत्वपूर्ण है। भारी बारिश के साथ भूस्खलन, सड़क अवरोध, नदियों और नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने तथा बिजली गिरने जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।

ऐसे में स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन तंत्र, सड़क एजेंसियों और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा। यात्रियों को निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। वहीं संवेदनशील ढलानों, नदी-नालों और पहले से प्रभावित सड़कों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचना चाहिए।

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कुल मिलाकर, उत्तराखंड में अगले पांच दिन मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। 18 और 19 अगस्त को खास सतर्कता की जरूरत है, लेकिन 20 से 22 अगस्त तक भी बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। IMD के अनुसार 18 अगस्त को जारी यह पूर्वानुमान समय के साथ अपडेट हो सकता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर जारी होने वाली नई चेतावनियों और प्रशासनिक एडवाइजरी को प्राथमिकता देना जरूरी है।

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Source: भारत मौसम विज्ञान विभाग, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून, 18 अगस्त 2026 को जारी जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनी।