देश में आजादी के समय से ही सभी धर्मों के लोगों के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी-UCC) लागू करने को लेकर बहस चल रही थी। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने,अपने गठन के बाद से ही समान नागरिक संहिता को अपने कोर एजेंडे में रखा।लेकिन इस पर असल तेजी बीते दो वर्ष में आई, जब उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गत विधानसभा चुनाव में प्रदेश के लिए यूसीसी लागू करने की घोषणा की। अब वर्ष 2024 में यूसीसी पर छिड़ी बहस, उत्तराखंड के माध्यम से हकीकत में तब्दील हो गई है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा कर,सबको चौंका दिया था। इसके बाद प्रदेश में फिर भाजपा सरकार बनने पर मई 2022 में सीएम धामी ने तय वायदे के मुताबिक यूसीसी को लेकर कदम बढ़ाया।उन्होंने यूसीसी का ड्राफ्ट तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाकर इस दिशा में ठोस पहल की। उक्त समिति ने 72 बैठकों के बाद पिछले साल दो फरवरी को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
इसके बाद धामी सरकार ने अभूतपूर्व तेजी दिखाते हुए, चार फरवरी को ही कैबिनेट बैठक में रिपोर्ट रखते हुए, इसे मंजूर कर दिया। साथ ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर यूसीसी पर रिपोर्ट,सदन में भी पेश कर दी। सात फरवरी को रिपोर्ट को विधानसभा से पारित कर दिया गया।चूंकि ये विधेयक केंद्रीय कानूनों से मिलता-जुलता था, ऐसे में विधानसभा से मंजूरी के बाद, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह(सेनि)ने इसे अपने स्तर से स्वीकृति देने के बजाय केंद्र सरकार के जरिए राष्ट्रपति भवन भेज दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा दो सप्ताह से पहले ही बिल को हरी झंडी दिखा दी गई और विधेयक वापस उत्तराखंड सरकार को मिल गया। अब बिल को विधिवत तौर पर लागू करने की औपचारिकताभर शेष है। इस तरह 75 साल की बहस छोटे से राज्य उत्तराखंड के जरिए दो साल की कसरत के बाद ही हकीकत में बदल गई।
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