Live पहली झलक – बद्रीनाथ धाम में आज से दर्शन देंगे श्री हरि नारायण – कपाट खुले, गूंज उठी देवभूमि

आज सुबह सवेरे की सबसे बड़ी खबर – देवभूमि उत्तराखंड से

देवभूमि की पवित्र वादियाँ आज दिव्यता और उल्लास से गूंज उठीं।

बद्रीनाथ धाम – जहाँ हिमालय की गोद में विराजते हैं स्वयं भगवान विष्णु – आज सुबह 6 बजे कपाट खुलते ही आस्था की एक सुनामी बह निकली। हजारों श्रद्धालुओं की आँखों में आँसू थे, होंठों पर जयकार, और हृदय में बस एक ही पुकार – “बदरीनाथ भगवान की जय!”

सभी दिशाओं से गूंजा नारायण नाम

जैसे ही मुख्य पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ श्रीहरि के कपाट खोले, मंदिर प्रांगण ‘जय बदरीविशाल’ के नारों से गूंज उठा। अलकनंदा के कलकल बहते जल के बीच आरती की ध्वनि और शंखनाद ने वातावरण को रोमांच और श्रद्धा से सराबोर कर दिया।

बर्फ की चादर के बीच सजी भक्ति की बगिया
मंदिर के चारों ओर अभी भी हिम की सफेदी है, पर जैसे ही श्रीहरि नारायण का प्रथम दर्शन हुआ, भक्तों की भक्ति की ऊष्मा ने उस ठिठुरन को भी हर लिया। मंदिर को 15 क्विंटल फूलों से सजाया गया – केसरिया, पीला, नीला, गुलाबी – हर रंग जैसे स्वयं देवताओं की उपस्थिति को साकार कर रहा हो।

पहली झलक, एक अद्भुत अनुभव

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सुबह 6 बजे जैसे ही ‘श्री बद्रीनारायणाय नमः’ का मंत्र गूंजा, कपाट खोले गए और श्री हरि का प्रथम श्रृंगार दर्शन हुआ – पीताम्बर वस्त्र, मुकुट पर कमल का चिन्ह, नेत्रों में करुणा और तेज, और मुख पर ऐसी मुस्कान जो त्रिकाल को भी बाँध ले।

राजसी स्वागत, ऋषियों की परंपरा में
उत्तराखंड सरकार, बद्री-केदार समिति और सेना के जवानों ने मिलकर कपाट उद्घाटन को भव्यता दी। मंदिर के पौराणिक स्तंभों और गर्भगृह की दीवारों पर गूंजते वैदिक स्वरों ने जैसे त्रेता और द्वापर युग की झलक दे दी।

हजारों श्रद्धालुओं ने किया श्रीहरि का जयकार
देशभर से आए भक्तों ने बर्फीली वादियों में खड़े होकर सिर्फ एक ही उद्देश्य से तप किया – श्रीहरि का प्रथम दर्शन। एक बुज़ुर्ग महिला के शब्द थे – “यह केवल दर्शन नहीं, पुनर्जन्म है!”

आज से आरंभ होगी श्रीहरि की पूजा, वैष्णव पंचांग के अनुसार अनुष्ठान
कपाट खुलने के साथ ही 6 महीने तक श्रीबद्रीनाथ की विधिवत पूजा, आरती, हवन और यज्ञ होंगे। वैष्णव आचार्यगण के नेतृत्व में यह सम्पूर्ण अनुष्ठान हर दिन भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा।


बद्रीनाथ – सिर्फ तीर्थ नहीं, श्रीहरि के धाम की पुकार
देवभूमि की यह सुबह सिर्फ एक धार्मिक क्षण नहीं, बल्कि उस चेतना का आरंभ है जहाँ भक्त और भगवान एक ही स्पंदन में बंध जाते हैं। बद्रीनाथ के कपाट खुलना मतलब – कलियुग में मोक्ष का द्वार खुलना।

 

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