अमृतसर/नई दिल्ली:
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने पाकिस्तान सरकार को बड़ा झटका देते हुए ऐलान किया है कि कोई भी सिख तीर्थयात्री महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि पर पाकिस्तान नहीं जाएगा। SGPC ने पाकिस्तान की ओर से भेजे गए निमंत्रण को साफ तौर पर अस्वीकार कर दिया है।
क्या है मामला?
पाकिस्तान ने 2 जून को एक आधिकारिक निमंत्रण जारी करते हुए भारत समेत विश्वभर के सिख श्रद्धालुओं को 27 जून को लाहौर स्थित गुरुद्वारा डेहरी साहिब में महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर आयोजित धार्मिक समारोहों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन SGPC ने स्पष्ट कर दिया है कि इस वर्ष किसी भी सिख जत्थे को पाकिस्तान नहीं भेजा जाएगा।

SGPC का बयान – “हालात नहीं हैं सुरक्षित”
SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा कि:
“हम पाकिस्तान में सिखों के पवित्र स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियाँ वहां के हालात को अनुकूल नहीं बनातीं। हमारे तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।”
पंजाब सरकार पर भी उठे सवाल
SGPC ने इस फैसले के पीछे पंजाब सरकार और केंद्र सरकार की उदासीनता को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से स्पष्ट मार्गदर्शन और सहयोग न मिलने के कारण भी यह फैसला लेना पड़ा है।
पाकिस्तान की किरकिरी
इस फैसले से पाकिस्तान की ‘धार्मिक कूटनीति’ को बड़ा झटका लगा है। भारत में लगातार बिगड़ते द्विपक्षीय संबंधों के बीच पाकिस्तान धार्मिक यात्राओं के माध्यम से ‘सॉफ्ट पावर’ स्थापित करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन SGPC के इस इनकार ने उसकी कोशिशों पर पानी फेर दिया है।
पाकिस्तान में सिख विरासत पर मंडरा रहे खतरे
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान स्थित सिख गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों पर हुई तोड़फोड़, अव्यवस्थाएं, सुरक्षा चूक और सिखों के साथ भेदभावपूर्ण घटनाएं सामने आती रही हैं। SGPC बार-बार पाकिस्तान सरकार से इन मुद्दों को उठाती रही है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
🔥 SGPC के इस फैसले के मायने:
- यह फैसला भारत के सिख समुदाय की संप्रभुता, सुरक्षा और सम्मान को दर्शाता है।
- यह पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश है कि धार्मिक विश्वासों को राजनीतिक मकसदों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
- इससे केंद्र सरकार पर भी दबाव बनेगा कि वह सिख धार्मिक यात्राओं को लेकर एक सशक्त नीति तैयार करे।
सिख श्रद्धालुओं के लिए यह फैसला कठिन हो सकता है, लेकिन SGPC ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सिखों की सुरक्षा, सम्मान और विरासत के संरक्षण की गारंटी नहीं देता – तब तक ‘श्रद्धा की यात्रा’ संभव नहीं।