दिल्ली की सत्ता गलियों में हलचल तेज़ है। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के मानसून सत्र से पहले अपनी कैबिनेट में एक “छोटे फेरबदल” की तैयारी में हैं। संसद का यह सत्र 21 जुलाई से शुरू होने की संभावना है, और इससे पहले इस ‘सर्जरी’ को अंजाम दिया जाना तय माना जा रहा है।
क्यों जरूरी हो गया ये फेरबदल?
तीसरी बार सत्ता में लौटे नरेंद्र मोदी ने अब तक अपने मंत्रिमंडल में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। लेकिन, कई मंत्रालयों की परफॉर्मेंस को लेकर फीडबैक और कुछ राजनीतिक संतुलनों को साधने की ज़रूरत अब आकार लेती दिख रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में प्रतिनिधित्व का संतुलन, NDA सहयोगियों की मांग और लोकसभा चुनाव 2024 में जीत की रणनीति – ये सब इस बदलाव के पीछे की बड़ी वजहें मानी जा रही हैं।
कौन जा सकता है, कौन आ सकता है?
हालांकि नाम अभी पर्दे में हैं, लेकिन कुछ वरिष्ठ नेताओं के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि युवा चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है। साथ ही कुछ नये ADG रैंक के अधिकारी व नौकरशाहों को सलाहकार या विशेष भूमिका में लाने की भी तैयारी है।
NDA के पुराने सहयोगी और हाल ही में जुड़े दल भी अपनी हिस्सेदारी को लेकर मुखर हैं। ऐसे में कुछ नए नाम मंत्रिपरिषद में शामिल हो सकते हैं जो क्षेत्रीय संतुलन और चुनावी समीकरणों को साध सकें।
समय और संदेश
संसद सत्र से ठीक पहले ये फेरबदल न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है – कि मोदी सरकार एक्टिव मोड में है और अगला कार्यकाल केवल “सत्ता का विस्तार” नहीं बल्कि “गवर्नेंस का फोकस” होगा।
क्या संकेत दे रहा है PMO?
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। गृहमंत्री, रक्षा मंत्री और संगठन के प्रमुख नेताओं के साथ मंत्रणा के बाद अब अंतिम सूची पर काम चल रहा है। इसकी औपचारिक घोषणा संसद सत्र से ठीक पहले या उसके आसपास किसी भी दिन की जा सकती है।
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