ECI का बड़ा रुख: “आधार से पहचान मिलेगी, नागरिकता नहीं – वोट का अधिकार सिर्फ वैध नागरिकों को”

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक हलफनामा दायर करते हुए साफ किया है कि “आधार कार्ड, राशन कार्ड या वोटर ID नागरिकता के प्रमाण नहीं माने जा सकते।” यह बयान उस समय आया है जब बिहार में 11,000 संदिग्ध मतदाताओं की पहचान बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के रूप में हुई है, जो संभवतः फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए मतदाता सूची में घुस आए।

ECI का स्पष्ट प्रस्ताव है कि:

“आप आधार कार्ड के सहारे सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन जब बात भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मताधिकार की होगी, तो केवल वैध नागरिक ही वोट डाल सकेंगे।”


क्या कहा चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में आयोग ने तीन ठोस बातें रखी:

  1. पहचान और नागरिकता अलग चीजें हैं:
    आधार, राशन कार्ड और वोटर ID सिर्फ पहचान पत्र हैं, ये नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं।
  2. आयोग को नागरिकता जांचने का अधिकार है:
    संविधान के अनुसार, आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता की वैधता को जांच सकता है।
  3. वोटर लिस्ट से नाम हटाना नागरिकता छीनना नहीं:
    अगर किसी का नाम हटाया जाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी नागरिकता खत्म की जा रही है – यह सिर्फ मताधिकार पर रोक है।

बिहार बना है हॉटस्पॉट

बिहार में चल रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के दौरान यह सामने आया कि:

  • 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 41.6 लाख मतदाता अपने पते पर नहीं मिले।
  • इनमें से 11,000 संदिग्धों की पहचान ऐसे लोगों के रूप में हुई जिनके न तो पड़ोसी उन्हें पहचानते हैं और न ही दिए गए पते मौजूद हैं।
  • संभावना जताई गई कि ये लोग बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठिए हो सकते हैं।

ECI इन 11,000 नामों को मतदाता सूची से हटाने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन यह कदम कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त सबूतों के आधार पर ही उठाया जाएगा।


राजनीतिक हलकों में घमासान

  • विपक्ष ने इसे ‘विशेष समुदायों को निशाना बनाने की कोशिश’ बताया है।
  • वहीं सत्ताधारी दलों ने ECI के कदम को “चुनाव की शुद्धता बचाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्यवाही” बताया।

क्या होगा आगे?

  • ड्राफ्ट मतदाता सूची: 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित की जाएगी।
  • अंतिम सूची: 30 सितंबर 2025 को जारी होगी।
  • सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई 2025 को इस मामले की अगली सुनवाई करेगा।

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