ऋषिकेश इन दिनों गंगा की उफनती लहरों के बीच सांसें गिन रहा है। भारी बारिश के चलते गंगा का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि परमार्थ निकेतन आश्रम की घाटी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है और महादेव की भव्य शिवमूर्ति भी अब पानी में डूब चुकी है।
यह दृश्य ना सिर्फ भयावह है, बल्कि चेतावनी है कि प्रकृति के आगे इंसान की तैयारियाँ कितनी छोटी साबित हो सकती हैं।
बारिश ने मचाई तबाही, गंगा पहुंची शिव के चरणों तक

बीते 24 घंटों से उत्तराखंड के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो रही है, पर ऋषिकेश की स्थिति सबसे भयावह हो गई है। गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और अब शिवमूर्ति की छाती तक पानी पहुँच चुका है। आमतौर पर जो मूरत गंगा तट से ऊँचाई पर स्थित रहती है, उसका इस तरह जलमग्न होना दशकों में पहली बार देखा गया दृश्य माना जा रहा है।
परमार्थ निकेतन घाट डूबे, श्रद्धालु सहमे
परमार्थ निकेतन, जो हर रोज़ श्रद्धालुओं से भरा रहता था, अब पूरी तरह खाली है। घाटों पर पानी भर चुका है, और प्रशासन ने किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। आरती की आवाज़ अब लहरों के शोर में गुम हो चुकी है।
प्रशासन का हाई अलर्ट, SDRF को सतर्क रहने के निर्देश
देहरादून जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने ऋषिकेश सहित आसपास के सभी संवेदनशील क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। SDRF की टीमें तैनात की जा चुकी हैं और गंगा के तटों पर किसी भी आमजन की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील
प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि श्रद्धालु व पर्यटक इस समय किसी भी कीमत पर गंगा घाटों की ओर रुख न करें। गंगा किसी भी समय और उग्र हो सकती है, जिससे जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है मौसम विभाग का अलर्ट?
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश और पहाड़ों में भूस्खलन की आशंका के चलते राज्य के कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
ऋषिकेश की यह स्थिति इस बात की चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार हो रहे पर्यावरणीय दोहन का खामियाजा अब हर साल भारी तबाही के रूप में सामने आ रहा है। प्रशासन की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करना अब सीधे जान के जोखिम जैसा बन चुका है।
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