जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पाडर उपखंड में एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने जन-जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। चिशोटी गांव में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस हादसे में अब तक 28 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य अभी भी लापता हैं। घटना मचैल माता की वार्षिक यात्रा के दौरान हुई, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

गुरुवार सुबह अचानक आसमान से आफत बरसी और तेज बारिश के साथ पहाड़ों से आया पानी बस्ती में घुस गया। देखते ही देखते घर, दुकानें, खेत और सड़कें पानी और मलबे में समा गईं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी का बहाव इतना तेज था कि लोग संभल ही नहीं पाए। कई घर पूरी तरह बह गए और कुछ क्षतिग्रस्त हो गए।
प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी रास्तों और लगातार खराब मौसम के कारण ऑपरेशन में भारी मुश्किलें आ रही हैं। NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। हेलीकॉप्टर से भी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

मौके पर मौजूद एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। सबकुछ चंद मिनटों में खत्म हो गया। कई लोग मलबे में दब गए और पानी में बह गए।”
चिशोटी गांव में मातम का माहौल है। प्रभावित परिवार अपने प्रियजनों को खोने के सदमे में हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। वहीं, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए इलाके में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
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