परमार्थ निकेतन गंगा आरती भारत की बेटियों की ऐतिहासिक जीत को समर्पित — स्वामी चिदानन्द सरस्वती बोले, “यह केवल ट्रॉफी की नहीं, भारत के सपनों की जीत है”

नारी शक्ति को समर्पित गंगा आरती का अद्भुत दृश्य

ऋषिकेश, 2 नवम्बर। भारत की महिला क्रिकेट टीम द्वारा विश्व कप की ऐतिहासिक जीत ने पूरे देश को उल्लास और गर्व से भर दिया है। इस गौरवशाली क्षण को श्रद्धांजलि स्वरूप परमार्थ निकेतन के पवित्र गंगा तट पर आज विशेष गंगा आरती का आयोजन हुआ, जो भारत की नारी शक्ति को समर्पित रहा।
दीपों की रोशनी से आलोकित गंगा तट पर जब तिरंगा लहराया गया, तब हर हृदय “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस विशेष अवसर पर कहा—
“भारत ने नारी शक्ति को सदैव ही चैम्पियन माना है। हमारे शास्त्र कहते हैं — यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः। जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।”

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भारतीय बेटियों को आमंत्रण और सम्मान की घोषणा

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कप्तान हारमनप्रीत कौर और पूरी भारतीय टीम को ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए घोषणा की कि—
“परमार्थ निकेतन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सभी बेटियों को सम्मानित करेगा और उन्हें विशेष आमंत्रण देगा।”
उन्होंने कहा कि गंगा तट से यह संदेश पूरे विश्व तक पहुँचे कि भारत की बेटियाँ केवल परंपराओं की संरक्षिका नहीं, बल्कि विजय और नेतृत्व की अग्रदूत हैं।


संघर्ष से सफलता तक – नारी सशक्तिकरण की मिसाल

स्वामी जी ने कहा कि यह विजय सिर्फ ट्रॉफी की नहीं, बल्कि हर उस माता-पिता, गुरु और बेटी की जीत है, जिन्होंने विश्वास रखा कि बेटियाँ भी विश्व विजेता बन सकती हैं।
उन्होंने कहा —
“2005 के दर्द से लेकर 2017 के संघर्ष तक का यह सफर आज विजय में बदल गया है। यह हर उस बेटी की जीत है जिसने खिलौनों की जगह बल्ला उठाया और मैदान में सपनों की नींव रखी।”


गंगा आरती में गूंजा ‘भारत माता की जय’

गंगा तट पर आरती के दौरान दीपों की लौ, तिरंगे की चमक और जयघोष का संगम एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। देशभक्ति और गर्व की इस भावना में शामिल सैकड़ों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।


नारी शक्ति के पुनरुत्थान का संदेश

स्वामी जी ने आह्वान किया कि हर भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि भारत की हर बेटी अपने सपनों के साथ आगे बढ़ेगी और समाज उसका साथ देगा।
उन्होंने कहा कि खेल, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक—हर क्षेत्र में नारी नेतृत्व का मार्ग और विस्तृत किया जाएगा।
यह केवल खेल की जीत नहीं, बल्कि विश्व शांति, समता और समान अधिकारों का संदेश है।


परमार्थ निकेतन का नारी शक्ति को नमन

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा —
“आज भारत की बेटियाँ हर मंच पर प्रेरणा बन रही हैं। यह विजय नारी सामर्थ्य, नारी शौर्य और नारी गौरव का शंखनाद है।”
उन्होंने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनाया जाए, ताकि हर बेटी आत्मविश्वास के साथ कह सके — “मैं भी विश्व विजेता बन सकती हूँ।”

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