वीरप्पन को पकड़ने वाले कीर्तिचक्र विजेता पी. श्रीनिवास की स्मृति में व्याख्यान से गूंजा वन अकादमी परिसर

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में हुआ भावनात्मक स्मृति कार्यक्रम

देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में 10 नवंबर 2025 को एक विशेष अवसर रहा, जब पूरे परिसर में एक ऐसे अधिकारी की यादों की गूंज सुनाई दी, जिसने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए जान न्योछावर कर दी।
1979 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारी स्व. पी. श्रीनिवास की स्मृति में आयोजित वार्षिक ‘पी. श्रीनिवास स्मृति व्याख्यान’ में वन सेवा के अधिकारी, प्रशिक्षु और वरिष्ठजनों ने उनकी वीरता को नमन किया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और स्व. श्रीनिवास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री सिद्धांत दास (सेवानिवृत्त भा.व.से.), अध्यक्ष, केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Central Empowered Committee) ने प्रेरक व्याख्यान दिया और परिसर में पौधारोपण भी किया, जो पर्यावरण संरक्षण और वन सेवा की परंपरा का प्रतीक रहा।


एक साहसी अधिकारी की गाथा

स्व. पी. श्रीनिवास, कर्नाटक कैडर के 1979 बैच के आईएफएस अधिकारी थे। उनके समय में कर्नाटक और तमिलनाडु के जंगलों में कुख्यात तस्कर वीरप्पन का आतंक फैला हुआ था। सरकार ने वीरप्पन को पकड़ने के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई, जिसमें श्रीनिवास भी शामिल थे।

उनके अथक प्रयासों से वीरप्पन के भाई और मुख्य साथी ने आत्मसमर्पण किया। वे पहले और एकमात्र अधिकारी बने जिन्होंने 1986 में वीरप्पन को गिरफ्तार करने में सफलता पाई। लेकिन 10 नवंबर 1991 को वीरप्पन ने आत्मसमर्पण का झूठा संदेश भेजकर 37 वर्षीय निहत्थे श्रीनिवास की निर्मम हत्या कर दी

भारत सरकार ने उनके अतुलनीय साहस और बलिदान को सम्मानित करते हुए 26 जनवरी 1992 को मरणोपरांत कीर्तिचक्र से सम्मानित किया।


“देश को चाहिए ऐसे बहादुर अधिकारी” — सिद्धांत दास

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि श्री सिद्धांत दास ने कहा कि देश को ऐसे और अधिकारी चाहिए, जिनमें न केवल साहस और निष्ठा हो, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव भी हो। उन्होंने कहा कि श्रीनिवास का जीवन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है — एक ऐसा उदाहरण जो बताता है कि सच्चा अधिकारी वही है जो जोखिम के बावजूद कर्तव्य से पीछे न हटे।


नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत

आईजीएनएफए हर वर्ष इस स्मृति व्याख्यान का आयोजन करती है ताकि श्रीनिवास जैसे अधिकारी की लोकसेवा भावना, नैतिकता और वीरता की प्रेरणा नई पीढ़ी के वन सेवा प्रशिक्षुओं तक पहुंचे।
कार्यक्रम में श्रीमती भारती, निदेशक, आईजीएनएफए; श्री राजकुमार बाजपेयी, अपर निदेशक; अकादमी के संकाय सदस्य, विभिन्न वन संस्थानों के प्रमुख, अनुभवी आईएफएस अधिकारी, 2024 बैच के परिवीक्षार्थी और एफआरआई डीम्ड यूनिवर्सिटी के छात्र उपस्थित रहे।

इस पूरे आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सच्चे अधिकारी का जीवन सेवा, साहस और समर्पण का पर्याय होता है — और स्व. पी. श्रीनिवास इसकी अमिट मिसाल हैं।

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