🕉️ संजय मिश्रा की पहल से सनातन चेतना का आह्वान
मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश। क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी और नवीन गुड़ मंडी व्यापार संघ के अध्यक्ष संजय मिश्रा आगामी 7 दिसंबर 2025 (रविवार) को मुजफ्फरनगर के शुक्रतीर्थ स्थित श्री बालाजी योग विज्ञान अनुसंधान केंद्र (महाशक्ति सिद्धपीठ) में एक ऐतिहासिक आयोजन—‘सनातन धर्म संसद’—आयोजित करने जा रहे हैं।
यह आयोजन हिंदू संघर्ष समिति के बैनर तले हो रहा है, जिसकी रूपरेखा और दिशा स्वयं संजय मिश्रा तय कर रहे हैं।
संजय मिश्रा ने बताया कि यह धर्म संसद केवल एक धार्मिक सभा नहीं, बल्कि सनातन धर्म के पुनरुत्थान, सामाजिक एकता और हिंदू राष्ट्र निर्माण के संकल्प का सशक्त प्रतीक होगी। उनका कहना है कि “समय आ गया है जब भारत अपने वास्तविक स्वरूप—हिंदू राष्ट्र—की ओर लौटे।”
📍 आयोजन का उद्देश्य और मिश्रा की दृष्टि
संजय मिश्रा ने कहा कि “अखंड भारत उद्देश्य हमारा” का भाव इस धर्म संसद का मूल मंत्र होगा।
उनका मानना है कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन की एक वैज्ञानिक और संतुलित व्यवस्था है, जिसे अब वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि इस संसद के माध्यम से संतों, विद्वानों, समाजसेवकों और युवाओं को एक साझा मंच पर लाकर सनातन विचारधारा के संरक्षण और प्रसार पर मंथन किया जाएगा।
मिश्रा का कहना है—“धर्म संसद देश की आत्मा के पुनर्जागरण का प्रारंभ है, और यह मुजफ्फरनगर की धरती से ही उठने वाला स्वर पूरे राष्ट्र में गूंजेगा।”
📌 संसद का आठ सूत्रीय एजेंडा
संजय मिश्रा के मार्गदर्शन में तैयार इस धर्म संसद का एजेंडा आठ प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है, जो राष्ट्रीय और धार्मिक दृष्टि से गहन महत्व रखते हैं—
1️⃣ भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की माँग।
2️⃣ केंद्र सरकार द्वारा ‘सनातन बोर्ड’ का गठन।
3️⃣ जातिगत भेदभाव समाप्त कर सामाजिक समरसता को सशक्त करना।
4️⃣ जनसंख्या नियंत्रण कानून और समान नागरिक संहिता लागू करने की माँग।
5️⃣ राष्ट्र निर्माण में संत समाज की निर्णायक भूमिका तय करना।
6️⃣ आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त हिंदू मंदिरों को पुनः हिंदुओं को लौटाने हेतु विशेष कानून बनाना।
7️⃣ सनातन धर्म के रक्षकों और धर्मयोद्धाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
8️⃣ मुजफ्फरनगर जिले का नाम ‘लक्ष्मीनगर’ करने की माँग।
संजय मिश्रा के अनुसार, ये माँगें किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता के पुनर्स्थापन का प्रतीक हैं।
🗣️ समाज को जोड़ने का प्रयास
संजय मिश्रा पिछले कई वर्षों से मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक समरसता, गोसंरक्षण और धार्मिक एकता के लिए सक्रिय हैं।
उनकी पहल पर यह धर्म संसद आध्यात्मिक और सामाजिक विमर्श का संगम बनने जा रही है, जहाँ संत समाज और जनप्रतिनिधि मिलकर सनातन धर्म की दिशा और दशा पर विचार करेंगे।
मिश्रा का मानना है कि सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए व्यापारिक, सामाजिक और आध्यात्मिक वर्गों का एकजुट होना अनिवार्य है। इसी भावना से उन्होंने इस संसद में समाज के हर वर्ग को आमंत्रित किया है।
🧭 वर्तमान परिदृश्य में आयोजन का महत्व
देश में वर्तमान समय में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code), जनसंख्या नियंत्रण, और धार्मिक स्थलों की ऐतिहासिक बहाली जैसे विषयों पर राष्ट्रीय बहस चल रही है।
ऐसे में संजय मिश्रा की अगुवाई में होने वाली यह धर्म संसद, राष्ट्रीय विमर्श को एक धार्मिक-सांस्कृतिक दिशा देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
🚨 प्रशासनिक तैयारियाँ
इस बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए मुजफ्फरनगर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतज़ाम शुरू कर दिए हैं।
आयोजन स्थल शुक्रतीर्थ और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती के साथ यातायात व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।
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