AI वीडियो के ज़रिए फर्ज़ी सरकारी योजनाओं का बड़ा जाल, सोशल मीडिया पर फैल रहा डिजिटल फ्रॉड

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों फर्ज़ी सरकारी योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रम फैलाया जा रहा है। इंस्टाग्राम अकाउंट “online_lone99” के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित वीडियो दिखाकर फ्री स्कूटी, फ्री कार, फ्री साइकिल, फ्री मोबाइल फोन और फ्री रिक्शा जैसी योजनाओं का दावा किया जा रहा है। फैक्ट चेक में यह साफ़ सामने आया है कि ये सभी वीडियो AI तकनीक से तैयार किए गए फर्ज़ी वीडियो हैं और सरकार की ओर से ऐसी किसी भी योजना की घोषणा नहीं की गई है।

डिजिटल माध्यमों पर तेजी से वायरल हो रहे इन वीडियो और पोस्ट्स ने आम लोगों को असमंजस में डाल दिया है। कई लोग इन्हें असली मानकर लिंक पर क्लिक कर रहे हैं, जो सीधे साइबर ठगी की ओर ले जाता है।

उत्तराखंड: अंकिता भंडारी केस पर उत्तराखंड पुलिस का बड़ा खुलासा


🔍 AI तकनीक से कैसे बनाया जा रहा है भरोसे का भ्रम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए अब किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की आवाज़, चेहरा और हावभाव की नकल करना बेहद आसान हो गया है। वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री के पुराने भाषणों की क्लिप्स को इस तरह एडिट किया गया है कि वे नई योजनाओं की घोषणा करते हुए प्रतीत हों। फैक्ट चेक के दौरान यह पुष्टि हुई कि वीडियो में न तो आधिकारिक भाषा है और न ही किसी वैध सरकारी स्रोत का उल्लेख।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के AI वीडियो का उद्देश्य लोगों का भरोसा जीतकर उनसे व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर या बैंक से जुड़ी डिटेल्स हासिल करना होता है।


💸 ₹46,715 की “सरकारी सहायता” वाला मैसेज भी पूरी तरह फर्जी

इसी तरह WhatsApp पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार गरीबों को ₹46,715 की आर्थिक सहायता दे रही है और इसके लिए एक लिंक पर क्लिक कर निजी जानकारी साझा करने को कहा जा रहा है। फैक्ट चेक में यह दावा भी पूरी तरह झूठा पाया गया है।

सरकार की किसी भी आधिकारिक योजना में इस तरह सीधे लिंक भेजकर जानकारी नहीं मांगी जाती। यह साफ तौर पर एक ऑनलाइन स्कैम है, जिसका मकसद लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाना है।


🛑 ऐसे फर्जी दावों से कैसे बचें

डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी “फ्री योजना” या “तुरंत पैसा” देने वाले दावे पर भरोसा करने से पहले सावधानी बेहद जरूरी है। फैक्ट चेक के बिना किसी भी वीडियो, पोस्ट या मैसेज को न तो शेयर करें और न ही उस पर कार्रवाई करें।

खासतौर पर वे संदेश जिनमें

  • तुरंत क्लिक करने का दबाव हो
  • व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाए
  • सरकारी लोगो या बड़े नेताओं के वीडियो दिखाए जाएं
    उनसे दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।

📍 उत्तराखंड समेत राज्यों में बढ़ रही डिजिटल ठगी की घटनाएं

उत्तराखंड जैसे राज्यों में, जहां डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, वहां इस तरह की ऑनलाइन ठगी के मामले भी बढ़े हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर ठग फर्जी योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं। फैक्ट चेक आधारित जागरूकता ही इसका सबसे प्रभावी समाधान है।


🧠 खुद कैसे करें फैक्ट चेक

किसी भी वायरल दावे पर भरोसा करने से पहले यह जरूर जांचें कि—

  • क्या सूचना किसी आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है
  • क्या वीडियो या पोस्ट में संदिग्ध लिंक दिए गए हैं
  • क्या भाषा में असामान्य वादे या जल्दबाज़ी दिखाई दे रही है
  • क्या भरोसेमंद समाचार माध्यमों ने उस दावे की पुष्टि की है

यदि इनमें से किसी भी बिंदु पर संदेह हो, तो समझ लें कि मामला फर्जी हो सकता है।


📢 जिम्मेदार नागरिक ही डिजिटल सुरक्षा की असली ताकत

डिजिटल युग में सिर्फ प्रशासन या मीडिया ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सजगता भी उतनी ही अहम है। बिना फैक्ट चेक किए किसी भी जानकारी को आगे बढ़ाना अनजाने में ठगों की मदद करना है। सही जानकारी साझा करना ही सुरक्षित डिजिटल समाज की बुनियाद है।

 

फ्री स्कूटी, फ्री कार या हजारों रुपये की “सरकारी सहायता” जैसे दावे जितने आकर्षक लगते हैं, उतने ही खतरनाक भी हो सकते हैं। सरकार की कोई भी वास्तविक योजना हमेशा आधिकारिक माध्यमों से घोषित की जाती है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। फैक्ट चेक अपनाएं और डिजिटल ठगी से खुद को सुरक्षित रखें।

2 thoughts on “AI वीडियो के ज़रिए फर्ज़ी सरकारी योजनाओं का बड़ा जाल, सोशल मीडिया पर फैल रहा डिजिटल फ्रॉड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *