दिल्ली से कोचीन तक खामोशी थी।
कोई PSLV पर बयान नहीं। कोई प्रेस नोट नहीं।
और फिर… सीधा एक्शन।
जब देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA)—जिसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हलकों में भारत का सबसे सख्त और शातिर रणनीतिकार माना जाता है—
👉 बिना सायरन
👉 बिना सरकारी काफिले
👉 बिना किसी घोषणा
एक आम यात्री की तरह फ्लाइट पकड़कर किसी अत्यंत संवेदनशील स्पेस लैब में दाख़िल हो जाए,
तो समझ लीजिए मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का है।
यह कोई औपचारिक दौरा नहीं था।
यह भारत के स्पेस प्रोग्राम को बचाने के लिए शुरू की गई खामोश लेकिन निर्णायक कार्रवाई थी।
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सूत्रों के मुताबिक, 22 जनवरी को
NSA अजीत डोभाल इंडिगो की नियमित फ्लाइट से चुपचाप तिरुवनंतपुरम पहुँचे।
- ❌ न स्वागत
- ❌ न प्रोटोकॉल
- ❌ न लोकल प्रशासन की मौजूदगी
- ❌ न सिक्योरिटी शो-ऑफ
साथ थे सिर्फ चार सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी।
एयरपोर्ट से गाड़ी सीधे विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के गेट पर जाकर रुकी।
यह खामोशी बहुत कुछ कह रही थी।
👉 साफ संकेत था कि सरकार अब सिर्फ रिपोर्ट्स पर भरोसा करने के मूड में नहीं थी।
🔥 PSLV फेलियर: एक्सीडेंट या साजिश?
यहीं से कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया।
ISRO की Failure Analysis Committee ने PSLV फेलियर का कारण बताया—
“मोटर चैंबर में प्रेशर लॉस”
लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जवाब पर्याप्त नहीं था।
सवाल सीधे और कठोर थे:
- दशकों से भरोसेमंद PSLV बार-बार फेल क्यों हो रहा है?
- क्या यह सिर्फ तकनीकी चूक है?
- या फिर कोई जानबूझकर भारत के स्पेस मिशन की रफ्तार रोकने की कोशिश कर रहा है?
यहीं से शक की सुई Sabotage (भीतरघात) की ओर घूम गई।
और यही वजह बनी NSA के सीधे मैदान में उतरने की।
🏛️ 48 घंटे, बंद दरवाजे और 6 गहन बैठकें
22 और 23 जनवरी—
VSSC के भीतर जो हुआ, वह पूरी तरह गोपनीय रहा।
सूत्र बताते हैं:
- NSA डोभाल ने
- VSSC डायरेक्टर
- और चुनिंदा वरिष्ठ वैज्ञानिकों
के साथ 6 लंबी, बंद कमरे की बैठकें कीं।
यह सिर्फ मीटिंग्स नहीं थीं।
👉 हर फ़ाइल
👉 हर डेटा
👉 हर उस व्यक्ति की भूमिका
खंगाली गई, जिसका किसी भी स्तर पर PSLV मिशन से संबंध था।
ISRO की ओर से अब तक इन बैठकों पर एक शब्द भी सार्वजनिक नहीं किया गया, जो इस मामले की संवेदनशीलता को और गहरा करता है।
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🚀 सीधा संदेश: अब कोई चूक नहीं चलेगी
VSSC से निकलने के बाद
NSA अजीत डोभाल कन्याकुमारी रवाना हो गए।
लेकिन पीछे छोड़ गए एक बेहद स्पष्ट संदेश—
“भारत का स्पेस मिशन सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ है।
इसके साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
सूत्रों के अनुसार, डोभाल जल्द ही अपनी डायरेक्ट रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप सकते हैं।
अगर किसी भी स्तर पर साजिश की पुष्टि होती है,
तो यह मामला तकनीकी विफलता से बहुत आगे जाएगा।
खेल अब गंभीर हो चुका है
यह दौरा
❌ कोई रूटीन इंस्पेक्शन नहीं
❌ कोई औपचारिक विज़िट नहीं
यह एक स्पष्ट चेतावनी थी।
अगर वाकई कोई “घर का भेदी” भारत के स्पेस मिशन को नुकसान पहुँचा रहा था,
तो अब उसके लिए बचने की कोई जगह नहीं।
भारत अब
🚀 अपने स्पेस भविष्य
🛡️ और राष्ट्रीय सुरक्षा
के साथ कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है।
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