प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान एक अनोखा स्टार्ट-अप चर्चा में है। दीपक गोयल नाम के एक युवा उद्यमी ने श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल डुबकी की सुविधा शुरू की है। उनका कहना है कि यह उन लोगों के लिए एक अनूठा अवसर है जो किसी कारणवश महाकुंभ में आकर त्रिवेणी संगम में स्नान नहीं कर पा रहे हैं। अब सिर्फ 1100 रुपए में घर बैठे लोग महाकुंभ का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
कैसे काम करता है डिजिटल स्नान?
इस प्रक्रिया में श्रद्धालुओं को केवल अपनी एक फोटो दीपक गोयल को भेजनी होती है। इसके बाद उनकी फोटो को प्रिंट करवाकर संगम तट पर विशेष रीति-रिवाजों के साथ स्नान कराया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाकर संबंधित व्यक्ति को भेज दिया जाता है, जिससे उन्हें यह अहसास हो सके कि उन्होंने भी महाकुंभ का स्नान किया है।
धार्मिक आस्था या व्यवसाय?
इस डिजिटल स्नान की शुरुआत को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे एक शानदार नवाचार मान रहे हैं, जो श्रद्धालुओं को आस्था से जोड़े रखने का एक आधुनिक तरीका है। वहीं, कुछ इसे धार्मिक भावनाओं के व्यावसायीकरण का नाम दे रहे हैं।
वहीं, दीपक गोयल का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल उन लोगों तक महाकुंभ का आध्यात्मिक अनुभव पहुंचाना है जो स्वयं वहां नहीं पहुंच सकते। उनका यह स्टार्ट-अप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं।
तकनीक और आस्था का संगम
महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों में आधुनिक तकनीक की बढ़ती भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डिजिटल डुबकी जैसी पहल इस बात का प्रमाण है कि कैसे आस्था और नवाचार मिलकर नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं। हालांकि, सवाल यह भी उठता है कि क्या केवल फोटो भेजने से और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए स्नान से वही पुण्य फल प्राप्त हो सकता है जो स्वयं डुबकी लगाने से मिलता है?
आगे की राह
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस डिजिटल स्नान का भविष्य क्या होता है। क्या यह सुविधा लोगों को आकर्षित करती रहेगी, या फिर धार्मिक समुदाय इसे अस्वीकार कर देगा? फिलहाल, यह अनोखा विचार इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है और कई लोग इसे एक रोचक प्रयोग के रूप में देख रहे हैं।
