देश की राजधानी दिल्ली और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जम्मू-कश्मीर—इन दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में प्रशासनिक बदलाव की चर्चाएं जोरों पर हैं। जहां दिल्ली में नए उपराज्यपाल (LG) की नियुक्ति को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है, वहीं जम्मू-कश्मीर में मनोज सिन्हा का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और उनके उत्तराधिकारी को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो चुका है।
📍 दिल्ली को मिल सकता है नया LG – कौन होगा ‘राजनिवास’ का अगला मुखिया?
दिल्ली में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की विदाई की सुगबुगाहट है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार जल्द ही दिल्ली के लिए एक नया चेहरा तय कर सकती है। सूत्रों की मानें तो छह नामों पर मंथन चल रहा है, जिनमें एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता और शेष सेवानिवृत्त नौकरशाह शामिल हैं।
दिल्ली जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गतिशील प्रदेश में उपराज्यपाल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, विशेषकर तब जब राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव के मुद्दे बार-बार सामने आते हों। इस परिस्थिति में केंद्र सरकार एक अनुभवी, प्रशासनिक दृष्टि से दक्ष और संतुलित व्यक्तित्व को यह जिम्मेदारी सौंपना चाहती है।
संभावित नामों में चर्चा में हैं:
- एक पूर्व गृह सचिव जिनकी सख्त कार्यशैली के लिए वे केंद्र में प्रसिद्ध रहे हैं।
- एक रिटायर्ड DGP जिनका दिल्ली पुलिस से गहरा जुड़ाव रहा है।
- एक सीनियर आईएएस अफसर जिनका नाम हाल ही में लोकपाल या अन्य उच्च पदों के लिए भी चर्चा में था।
- और एक पूर्व केंद्रीय मंत्री, जो वर्तमान में सक्रिय राजनीति से दूर हैं लेकिन दिल्ली की राजनीति को भली-भांति समझते हैं।
📍 जम्मू-कश्मीर में भी बदलाव तय? मनोज सिन्हा की जगह कोई नौकरशाह सम्भालेगा कमान!
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का कार्यकाल अगस्त 2025 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि केंद्र सरकार इस बार किसी राजनीतिक चेहरे की बजाय एक रिटायर्ड नौकरशाह को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है।
इस अटकल को बल इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि अब जम्मू-कश्मीर को एक चुनी हुई विधानसभा मिल चुकी है। ऐसे में उपराज्यपाल की भूमिका अधिक प्रशासनिक और समन्वयकारी रह जाती है, न कि सक्रिय राजनीतिक दखल देने वाली। मनोज सिन्हा ने बीते वर्षों में शांति, विकास और स्थायित्व के लिए सराहनीय कार्य किया है, लेकिन अब संभवतः केंद्र एक ऐसे LG को नियुक्त कर सकती है जो मुख्यतः संविधानिक और कानूनी दायरे में सरकार और केंद्र के बीच पुल का कार्य करे।
संभावित नामों की फेहरिस्त में ये चर्चाएं तेज़ हैं:
- एक पूर्व रक्षा सचिव, जिनकी रणनीतिक समझ मजबूत है।
- एक पूर्व RAW अधिकारी, जो घाटी की भौगोलिक और मानसिकता से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
- और एक पूर्व मुख्य सचिव जो जम्मू-कश्मीर में पहले सेवाएं दे चुके हैं।
🔥 राजनीतिक संकेत और रणनीतिक रणनीति!
इस दोहरी बदलाव की अटकलें केवल पदों की अदला-बदली नहीं हैं। यह बदलाव कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं:
- दिल्ली में 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। उपराज्यपाल की भूमिका प्रशासनिक संतुलन के साथ राजनीतिक टकरावों को नियंत्रित करने वाली होनी चाहिए।
- जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की बहाली के बाद पहली निर्वाचित सरकार बनने जा रही है। उपराज्यपाल का स्वरूप अब पहले की तुलना में अलग होगा—कमांडर की बजाय एक कॉन्स्टिट्यूशनल गार्जियन।
⏳ क्या जल्द होगी घोषणा?
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार इन दोनों LG पदों को लेकर जुलाई के अंत तक कोई बड़ा ऐलान कर सकती है। कई मंत्रालयों और एजेंसियों से परामर्श लिया जा चुका है, और पीएमओ स्तर पर अंतिम सहमति की प्रक्रिया चल रही है।
अब देखना यह है कि दिल्ली और जम्मू-कश्मीर को अगला उपराज्यपाल कौन मिलता है — कोई नया चेहरा या फिर अनुभव का धनी कोई पूर्व नौकरशाह?


