बिहार में सरकारी तंत्र की लापरवाही एक बार फिर मज़ाक का कारण बन गई, जब “डॉग बाबू” नामक एक कुत्ते के नाम पर आधिकारिक निवास प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। इससे पूरे पटना ज़िले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
ये कोई मज़ाक नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेज़ है!
यह सनसनीखेज मामला पटना के मसौढ़ी अंचल कार्यालय से जुड़ा है, जहां RTPS (Right to Public Service) काउंटर से दिनांक 24 जुलाई 2025 को एक निवास प्रमाण-पत्र जारी किया गया। आश्चर्य की बात यह है कि इस प्रमाण-पत्र में:
- नाम: डॉग बाबू
- पिता का नाम: कुत्ता बाबू
- माता का नाम: कुटिया देवी
- फोटो: एक असली कुत्ते की तस्वीर!
प्रमाण-पत्र पर बाकायदा बिहार सरकार का लोगो, क्यूआर कोड और राजस्व अधिकारी मुरारी चौहान के डिजिटल हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, जिससे यह दस्तावेज़ पूरी तरह आधिकारिक प्रतीत होता है।
📌 कैसे हुआ ये कारनामा?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह प्रमाण-पत्र सरकारी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर जारी किया गया था। कंप्यूटर ऑपरेटर ने बिना जानकारी की पुष्टि किए ही दस्तावेज़ को तैयार कर दिया और संबंधित अधिकारी ने उस पर हस्ताक्षर भी कर दिए। ये सीधे-सीधे सरकारी लापरवाही और तकनीकी चूक का मामला बन गया।
⚠️ प्रशासन की सख्ती और कार्रवाई
जैसे ही यह अजीब मामला मीडिया और सोशल मीडिया में फैला, पटना जिला प्रशासन हरकत में आ गया। तत्काल:
- प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया गया।
- आवेदक, कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दे दिए गए हैं।
- जांच समिति का गठन कर मामले की तह तक जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
तकनीकी युग में मानवीय चूक?
बिहार सरकार ने डिजिटल सेवाओं की पहुंच को ग्रामीण स्तर तक सुनिश्चित करने के लिए RTPS जैसी पहल शुरू की थी, लेकिन यह मामला दर्शाता है कि मशीन से ज्यादा ज़रूरी है मानवीय विवेक और सत्यापन। वरना, आज डॉग बाबू का प्रमाण-पत्र बना है, कल “कैट दीदी” या “बकरी भैया” की बारी भी आ सकती है!
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी सिस्टम में कितनी आसानी से सेंध लगाई जा सकती है। जरूरत है पारदर्शिता, ज़िम्मेदारी और तकनीकी निगरानी की — वरना ‘डॉग बाबू’ जैसे और भी किरदार हमारे सरकारी रिकॉर्ड्स में दर्ज होते रहेंगे!
