उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली गांव में मंगलवार सुबह कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि लोगों की रूह कांप गई। बादल फटने के बाद खीरगंगा नदी उफान पर आ गई और ऐसा सैलाब आया जिसने गांव की शक्ल ही बदल डाली।
पलभर में तबाह हो गया धराली बाजार
सुबह के समय जब लोग अपने रोज़मर्रा के कामों में जुटे थे, तभी आसमान से आफ़त बरसी। बादल फटने के कुछ ही मिनटों में खीरगंगा नदी में ऐसा उफान आया कि पूरा धराली बाजार पानी में समा गया। कई दुकानें, घर और होटल नदी की तेज़ धार में बह गए। आंखों के सामने सबकुछ तबाह होता देख लोग चीखने-चिल्लाने लगे लेकिन बचने का कोई रास्ता नहीं था।
मौके पर मौजूद एक स्थानीय निवासी ने बताया,
“सिर्फ़ पांच मिनट में सब बह गया… इतनी तेज़ आवाज थी कि लगा कोई बम फटा हो।”
चार लोगों की मौत, कई अब भी लापता
अब तक इस आपदा में चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन हालात को देखते हुए ये संख्या और बढ़ सकती है। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है। SDRF और NDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हैं, लेकिन तेज़ बहाव और लगातार बारिश से बचाव कार्य मुश्किल होता जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी एक्टिव मोड में
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और जिला प्रशासन को तत्काल राहत और बचाव कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से भी मदद की मांग की है और हेलिकॉप्टर भेजने का अनुरोध किया है ताकि फंसे हुए लोगों को समय रहते निकाला जा सके।
पूरे उत्तराखंड में रेड अलर्ट
इस त्रासदी ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील बताए हैं। भूस्खलन और भारी बारिश के कारण कई रास्ते बंद हो चुके हैं। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ी क्षेत्रों में न जाने की सख़्त हिदायत दी है।
यह घटना एक बार फिर हमें आगाह करती है कि हम चाहे जितनी भी तकनीकी प्रगति कर लें, प्रकृति के सामने हमारी कोई नहीं चलती। धराली में जो हुआ, वो सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, वो एक चेतावनी है — प्रकृति से छेड़छाड़ बंद करो, नहीं तो अंजाम और भी भयावह होंगे।
