Breaking News: video – देवभूमि के देहरादून में बादल फटा, सहस्त्रधारा से टपकेश्वर तक तबाही का मंजर, 2 लोग लापता, दुकानें और सड़कें वॉशआउट

देहरादून।
देवभूमि उत्तराखंड का देहरादून आज सुबह प्राकृतिक आपदा से थर्रा उठा। कारलीगाढ़ ग्राम में बादल फटने से पूरे इलाके में भारी तबाही मच गई। देर रात से लगातार हुई मूसलधार बारिश ने हालात इतने बिगाड़ दिए कि सहस्त्रधारा से लेकर टपकेश्वर तक तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है।

2 लोग लापता, दर्जनों दुकानें बह गईं

इस हादसे में अब तक 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं। कारलीगाढ़ बाजार की डेढ़ दर्जन से अधिक दुकानें बह गईं। तीन से चार रिसॉर्ट और होटल पूरी तरह तबाह हो गए। सौ से अधिक लोगों को NDRF और स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया है।

सड़कें और पुल बह गए

बारिश और बादल फटने से देहरादून की सड़कों का हाल बेहाल है। कई जगह सड़कें वॉशआउट हो गई हैं। बेली ब्रिज समेत तीन अन्य पुल ढह गए हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है। चारों तरफ मलबा और पानी के बीच लोग घंटों तक फंसे रहे।

सहस्त्रधारा और IT पार्क में हाहाकार

पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां की दुकानें, पार्किंग एरिया और आसपास के होटल पानी और मलबे में समा गए। वहीं, IT पार्क में कई गाड़ियां बुरी तरह फंस गईं। शहरभर में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

संकट में टपकेश्वर मंदिर

तमसा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टपकेश्वर मंदिर परिसर पानी में डूब गया। गुफाएं और मुख्य प्रांगण पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के फंसे होने की सूचना भी प्रशासन तक पहुंची है।

स्कूलों में अवकाश घोषित

भारी बारिश और बादल फटने से बनी भयावह स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने देहरादून के सभी स्कूलों में आज अवकाश घोषित कर दिया है। बच्चों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया।

प्रशासन अलर्ट पर

एनडीआरएफ, लोनिवि और जिला प्रशासन की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त बल भेजा है। मुख्यमंत्री कार्यालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

बड़ा सवाल: क्या सीखेंगे हम?

हर साल पहाड़ों में इस तरह की आपदाएं सामने आती हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्यों को लेकर सवाल जस के तस बने रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपदा प्रबंधन और निर्माण नियमों का सख्ती से पालन होता, तो नुकसान इतना व्यापक न होता।

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