उत्तरकाशी में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर गूंजा राष्ट्रप्रेम — जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा, “भारत माँ के प्रति समर्पण का प्रतीक है यह गीत”

जनपदभर में हर्षोल्लास से मनी वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ

उत्तरकाशी, 7 नवम्बर।
माँ भारती के प्रति समर्पण और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ आज जनपद में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर जिले के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी और निगम कार्यालयों के साथ-साथ विद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग व स्नातक कॉलेजों में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कर वातावरण को राष्ट्रभावना से भर दिया।


जिला कार्यालय प्रेक्षागृह में हुआ मुख्य आयोजन

जिला कार्यालय प्रेक्षागृह में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम की शुरुआत बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं द्वारा भावपूर्ण वंदे मातरम् गायन से हुई, जिसने सभी उपस्थित जनों के मन में देशभक्ति का संचार किया।

इस दौरान दिल्ली में आयोजित मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी प्रेक्षागृह में दिखाया गया, जिससे उत्तरकाशी के लोगों ने राष्ट्रव्यापी उत्सव का हिस्सा बनकर गर्व का अनुभव किया।


जिलाधिकारी ने दिया राष्ट्रसेवा का संदेश

अपने संबोधन में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि “वंदे मातरम् गीत भारत माँ के प्रति हमारे समर्पण, एकता और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। हमें इसके संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए देश के विकास और गौरव में योगदान देना चाहिए।”
उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं से राष्ट्रहित के लिए सदैव तत्पर रहने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।


अधिकारी-कर्मचारी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र, पूर्ति विभाग, खनन, निर्वाचन, सूचना, आपदा प्रबंधन सहित कलेक्ट्रेट के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभी ने वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में भाग लेकर देशप्रेम और एकता का संदेश दिया।


जनपद में गूंजा एक ही स्वर — “वंदे मातरम्”

दिनभर जनपद के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों में वंदे मातरम् की गूंज सुनाई देती रही।
विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तक, हर ओर राष्ट्रभक्ति का वातावरण बना रहा।
यह उत्सव न केवल एक गीत के प्रति श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि भारत की अखंडता, एकता और गौरवपूर्ण विरासत का उत्सव भी बना।

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