✍️ राजेन्द्र मोहन शर्मा
आर्थिक विश्लेषक
बजट 2026: ‘रचनात्मक भारत’ का उदय—कैसे स्क्रिप्ट राइटिंग और तकनीक बनेंगे नए भारत की पहचान?
🔶 कल्पना को मिला करियर का आधार-
भारतीय समाज में दशकों से एक कहावत प्रचलित रही है—”पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे होगे खराब।” वक्त बदला तो ‘खेलने’ की जगह ‘कला और लेखन’ ने ले ली, लेकिन धारणा वही रही कि ये शौक तो हो सकते हैं, आजीविका नहीं।
हालांकि, 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट इस रूढ़िवादी सोच पर अंतिम प्रहार करता नजर आता है। बजट के केंद्र में मौजूद ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ (रचनात्मक अर्थव्यवस्था) ने देश के करोड़ों कल्पनाशील युवाओं के लिए संभावनाओं के वे द्वार खोल दिए हैं, जो अब तक केवल इंजीनियरिंग या मेडिकल की दहलीज तक सीमित समझे जाते थे।
सरकार ने यह आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है कि एक विकसित राष्ट्र केवल कंक्रीट के ढांचे या मशीनों से नहीं, बल्कि ‘कंटेंट’ और ‘स्टोरीटेलिंग’ की सॉफ्ट पावर से बनता है। युवाओं के रोजगार संकट को दूर करने के लिए इस बार सरकार ने कारखानों के साथ-साथ ‘क्रिएटिव लैब्स’ पर जो बड़ा दांव लगाया है, वह आने वाले दशक की सबसे बड़ी ‘रचनात्मक रोजगार क्रांति’ साबित हो सकता है।
🔶 युवाओं के लिए वरदान: स्क्रिप्ट राइटिंग अब एक ‘फॉर्मल स्किल’
बजट 2026 की सबसे क्रांतिकारी घोषणा देशभर के 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ की स्थापना है। यह केवल एक तकनीकी बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं है, बल्कि भारत की शिक्षा पद्धति में एक युगांतकारी बदलाव है।
अब तक एक युवा को अपनी कहानी कहने या फिल्म बनाने की तकनीक सीखने के लिए महंगे निजी संस्थानों या महानगरों का रुख करना पड़ता था। अब सरकार इन लैब्स के जरिए ‘डिजिटल स्टोरीटेलिंग’ को गांव-गांव तक ले जाएगी।
रोजगार के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि भविष्य केवल कोडिंग का नहीं, बल्कि ‘कंटेंट’ का भी है। एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर के लिए सरकार का यह अनुमान कि 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी, सीधे तौर पर स्क्रिप्ट राइटर्स के लिए रोजगार की बाढ़ लाने वाला है।
बजट में प्रस्तावित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) इन कौशलों को प्रमाणित करेगा। अब छोटे शहरों का युवा, जिसके पास अपनी मिट्टी की अनूठी कहानियां हैं, वह केवल एक ‘इंफ्लुएंसर’ बनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह एक पेशेवर स्क्रिप्ट राइटर या कंटेंट आर्किटेक्ट के रूप में वैश्विक कंपनियों के साथ काम कर सकेगा।
एंट्री-लेवल पर ₹3 से ₹5 लाख तक का सालाना वेतन और फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स के जरिए लाखों की कमाई अब इस क्षेत्र को मुख्यधारा के रोजगार में तब्दील कर रही है।
🔶 मध्यम वर्ग और कर व्यवस्था- सरलीकरण का नया युग:
मध्यम वर्ग, जो हमेशा बजट से आयकर स्लैब में बड़ी कटौती की उम्मीद करता है, उसे इस बार सीधे तौर पर बड़ी छूट तो नहीं मिली, लेकिन ‘न्यू इनकम टैक्स एक्ट’ के रूप में एक दीर्घकालिक राहत का वादा जरूर मिला है।
1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला यह नया अधिनियम जटिल कानूनी शब्दावलियों को सरल बनाएगा, जिससे करदाताओं को वकीलों या सीए (CA) पर निर्भरता कम होगी।
विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए पैसे भेजने पर टीसीएस (TCS) को 5% से घटाकर 2% करना, विदेशी एसेट के खुलासे में छोटी तकनीकी त्रुटियों पर जुर्माने से राहत—यह सब सरकार के विश्वास-आधारित प्रशासन की ओर इशारा करता है।
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🔶 कृषि और ‘भारत विस्तार’: तकनीक से समृद्ध होता अन्नदाता-
कृषि क्षेत्र के लिए सरकार का दृष्टिकोण अब केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं है। बजट 2026 में ‘भारत विस्तार’ (Bharat Vistar) नाम का AI-आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लॉन्च किया गया है।
इसके माध्यम से अगले दो वर्षों में 6 करोड़ किसानों को डिजिटल पहचान दी जाएगी। मिट्टी की जांच, मौसम चेतावनी, कीट आक्रमण की सूचना—यह प्रिसिजन फार्मिंग का युग है।
दालों और तिलहन में आत्मनिर्भरता, 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा—यह सब किसान की आय और पर्यावरण दोनों के लिए निर्णायक है।
🔶 स्वास्थ्य और समावेशी विकास: क्षमता निर्माण पर ध्यान-
कैंसर, डायबिटीज और ऑटो-इम्यून बीमारियों सहित 17 गंभीर बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाना एक ऐतिहासिक मानवीय कदम है।
मेडिकल की 75,000 नई सीटें, लड़कियों के लिए छात्रावास, पीएम आवास योजना और मुफ्त राशन—यह बजट ‘ईज ऑफ लिविंग’ को नीति का केंद्र बनाता है।
🔶 बुनियादी ढांचा और भविष्य की ऊर्जा: 2047 का रोडमैप-
रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का Capex, 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और SMR परमाणु रिएक्टरों में ₹20,000 करोड़ का निवेश—यह भारत को ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स दोनों में आत्मनिर्भर बनाएगा।
2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य भविष्य की औद्योगिक जरूरतों का ठोस समाधान है।
🔶 बाजार का गणित: कड़वी लेकिन जरूरी खुराक
F&O पर STT बढ़ाना, शेयर बायबैक पर टैक्स और सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट—ये फैसले अल्पकालिक झटके हो सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन के लिए जरूरी हैं।
🔶 स्थिरता बनाम सुधार
बजट 2026 को “लोक-लुभावन” नहीं बल्कि “स्थिर और साहसी” कहना अधिक उपयुक्त होगा।
‘ऑरेंज इकोनॉमी’ से लेकर ‘परमाणु ऊर्जा’ तक, और ‘स्क्रिप्ट राइटिंग’ से लेकर ‘AI कृषि’ तक—यह बजट उस भारत की तस्वीर पेश करता है जो परंपरा में जड़ें जमाए हुए, लेकिन भविष्य की ओर पूरी रफ्तार से बढ़ रहा है।
यदि इन योजनाओं का क्रियान्वयन सही हुआ, तो बजट 2026 सिर्फ एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत’ की आधारशिला बनकर इतिहास में दर्ज होगा।
