देहरादून | राज्य डेस्क
उत्तराखंड की राजनीति में आज का दिन केवल एक धामी कैबिनेट की बैठक नहीं, बल्कि देवभूमि के अगले दशक का रोडमैप लेकर आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए फैसले साफ संकेत देते हैं कि सरकार अब घोषणाओं से आगे निकलकर संरचनात्मक बदलाव की दिशा में बढ़ चुकी है।
ये निर्णय एक साथ तीन मोर्चों पर प्रहार करते हैं—
✔ नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
✔ श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन
✔ स्वास्थ्य, रोजगार और कानून व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार
आइए, बिंदुवार समझते हैं कि ये फैसले क्यों ‘विकसित उत्तराखंड’ की नींव कहे जा रहे हैं।

धामी कैबिनेट में नशे के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: अब उत्तराखंड की अपनी एंटी नारकोटिक्स फोर्स
उत्तराखंड को 2025 तक नशा-मुक्त राज्य बनाने के संकल्प की दिशा में सरकार ने अब तक का सबसे निर्णायक कदम उठा लिया है।
👉 कैबिनेट ने Anti Narcotics Task Force (ANTF) के लिए 22 नए स्थायी पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है।
🔍 अब क्या बदलेगा?
अब तक यह फोर्स प्रतिनियुक्ति पर निर्भर थी, जिससे निरंतरता और जवाबदेही प्रभावित होती थी।
अब—
- ANTF का स्वतंत्र और स्थायी ढांचा होगा
- ऑपरेशन-आधारित कार्रवाई तेज होगी
- इंटर-स्टेट ड्रग नेटवर्क पर सीधा प्रहार संभव होगा
👮♂️ पदों में शामिल हैं:
- डिप्टी एसपी
- ड्रग इंस्पेक्टर
- सब-इंस्पेक्टर
- आरक्षी स्तर के अधिकारी
संदेश साफ है:
अब नशा कारोबारियों के लिए उत्तराखंड सेफ ज़ोन नहीं रहेगा।
वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को बड़ा तोहफा: अब न्यूनतम ₹18,000 मानदेय
देवभूमि के जंगलों की सुरक्षा करने वाले श्रमिक वर्षों से उपेक्षा का दंश झेलते रहे। अब सरकार ने मानवीय और नीतिगत दोनों स्तरों पर बड़ा फैसला लिया है।
👉 589 दैनिक वेतनभोगी वन कर्मियों का न्यूनतम वेतन अब ₹18,000 प्रतिमाह होगा।
🟢 क्यों अहम है यह फैसला?
- ये श्रमिक दशकों से जंगलों की रक्षा में लगे हैं
- प्राकृतिक आपदाओं और वन्यजीव खतरों के बीच काम करते हैं
- यह निर्णय श्रम सम्मान की नीति को मजबूत करता है
यह सिर्फ वेतन वृद्धि नहीं, बल्कि राज्य द्वारा स्वीकार किया गया योगदान है।
धामी कैबिनेट स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक विस्तार: ESI ढांचे का कायाकल्प
श्रमिकों और कर्मचारियों को बेहतर इलाज मिले—इस उद्देश्य से कैबिनेट ने
“उत्तराखंड कर्मचारी राज्य बीमा योजना नियमावली, 2026” को मंजूरी दे दी है।
🏥 क्या बदलेगा?
- ESI में पदों की संख्या 14 से बढ़ाकर 94
- 76 नए चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती
- उच्च स्तरीय प्रशासनिक पदों का सृजन
📌 इसका असर:
- सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होगी
- औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को बेहतर इलाज मिलेगा
- हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को लॉन्ग-टर्म मजबूती
यह फैसला वेलफेयर स्टेट मॉडल की ओर एक ठोस कदम है।
‘लोकल फॉर वोकल’ को नई रफ्तार: सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना का विस्तार
छोटे उद्यमी, महिला स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण स्टार्टअप्स के लिए राहत भरी खबर है।
👉 मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि
अब 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है।
🌱 क्यों है यह गेम-चेंजर?
- पहाड़ी उत्पादों को मिलेगा मार्केट
- ग्रामीण युवाओं को स्थानीय रोजगार
- माइग्रेशन पर रोक
- ‘मेक इन उत्तराखंड’ को मजबूती
धामी कैबिनेट का यह फैसला दिखाता है कि सरकार रोजगार को राजधानी नहीं, गांव तक ले जाना चाहती है।
जेल सुधार और कानूनी स्पष्टता: कानून व्यवस्था पर फोकस
⚖️ दो अहम फैसले:
- ‘आदतन अपराधी’ की परिभाषा स्पष्ट करने हेतु संशोधन विधेयक को मंजूरी
– यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है - कोविड काल में लाए गए
बोनस संदाय संशोधन विधेयक 2020 को वापस लेने का निर्णय
📌 नतीजा:
- कानून का दुरुपयोग रुकेगा
- जेल सुधार प्रणाली ज्यादा पारदर्शी बनेगी
- सामान्य हो चुकी परिस्थितियों में अस्थायी कानून हटेंगे
धामी कैबिनेट के ये निर्णय यह साबित करते हैं कि—
- नशा-मुक्ति सिर्फ नारा नहीं, सिस्टम-लेवल मिशन है
- श्रमिक और कर्मचारी केवल वोट बैंक नहीं, नीति के केंद्र में हैं
- स्वास्थ्य और रोजगार को राजनीतिक चश्मे से नहीं, भविष्य की जरूरत के रूप में देखा जा रहा है
यह कैबिनेट बैठक शासन नहीं, विज़न का संकेत देती है।
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Amitendra Sharma is a digital news editor and media professional with a strong focus on credible journalism, public-interest reporting, and real-time news coverage. He actively works on delivering accurate, fact-checked, and reader-centric news related to Uttarakhand, governance, weather updates, and socio-political developments.