उत्तरकाशी, 16 जनवरी ।
जनपद उत्तरकाशी में राजस्व प्रशासन को दुरुस्त करने की दिशा में जिला प्रशासन ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। शुक्रवार को एनआईसी सभागार में आयोजित राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में DM उत्तरकाशी प्रशांत आर्य ने दो टूक कहा कि अब राजस्व वसूली, बकाया देयों की रिकवरी और लंबित मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी तहसीलदारों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्य एवं विविध देयों की मांग के अनुसार वसूली में तत्काल तेजी लाई जाए और बड़े बकायेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजस्व अमीन की लापरवाही पर DM उत्तरकाशी का कड़ा रुख
समीक्षा बैठक के दौरान तहसील भटवाड़ी में राजस्व वसूली की स्थिति संतोषजनक न पाए जाने पर DM उत्तरकाशी ने नाराजगी व्यक्त की। जांच में सामने आया कि संबंधित राजस्व अमीन द्वारा वसूली देयों में अपेक्षित प्रगति नहीं की गई और कार्यों के प्रति गंभीरता का भी अभाव रहा।
इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक वेतन आहरण पर रोक लगाने के निर्देश तहसीलदार को दिए। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि अब प्रशासन केवल मौखिक चेतावनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवाबदेही तय कर कठोर प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

लंबित राजस्व वादों के निस्तारण पर विशेष फोकस
तीन से पांच वर्ष पुराने मामलों को प्राथमिकता
बैठक में DM उत्तरकाशी ने सभी उपजिलाधिकारियों (SDM) को निर्देश दिए कि तीन से पांच वर्ष की अवधि से लंबित राजस्व वादों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित राजस्व विवाद, भूमि संबंधी प्रकरण और विरासत के मामले आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी में डालते हैं और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निस्तारण की प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए।
विविध देयों की वसूली: अगले माह तक 100 प्रतिशत लक्ष्य
राजस्व समीक्षा के दौरान DM उत्तरकाशी ने विविध देयों की वसूली को लेकर कड़ा लक्ष्य तय करते हुए निर्देश दिए कि अगले माह तक शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित की जाए। जिन तहसीलों और क्षेत्रों में वसूली की प्रगति कमजोर पाई जाएगी, वहां जिम्मेदारी तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश सीधे तौर पर राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन और वसूली अमले की जवाबदेही को मजबूत करता है।
न्यायालयीन और प्रशासनिक मामलों की विस्तृत समीक्षा
विरासत, पेंशन और ऑडिट आपत्तियों पर निर्देश
बैठक में DM उत्तरकाशी ने परगना मजिस्ट्रेट न्यायालयों में—
- निस्तारित एवं लंबित फौजदारी वाद
- अविवादित विरासत प्रकरण
- ऑडिट आपत्तियां
- लंबित पेंशन मामले
- भूमि अध्याप्ति इकाइयों में लंबित प्रस्ताव
की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी मामलों में अनावश्यक देरी समाप्त कर निर्धारित समयसीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
व्यापार कर और पेंशन मामलों पर तय की गई स्पष्ट समयसीमा
राजस्व समीक्षा बैठक में—
- तहसील मोरी में व्यापार कर से जुड़े तीन लंबित मामलों को एक सप्ताह के भीतर निस्तारित करने के निर्देश तहसीलदार को दिए गए।
- तहसील डुंडा में लंबित तीन पेंशन प्रकरणों को भी एक सप्ताह के भीतर निस्तारण करने के निर्देश एसडीएम डुंडा को दिए गए।
DM उत्तरकाशी ने कहा कि पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में देरी सीधे तौर पर जरूरतमंद नागरिकों को प्रभावित करती है, इसलिए ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता अनिवार्य है।
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CM हेल्पलाइन और UCC की प्रगति की भी समीक्षा
बैठक में CM हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। DM उत्तरकाशी ने निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण, संतोषजनक और तथ्यात्मक निस्तारण किया जाए और उसकी रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत की जाए।
इसके साथ ही UCC (समान नागरिक संहिता) से संबंधित प्रगति की भी समीक्षा की गई, ताकि शासन की प्राथमिक नीतियों का प्रभावी और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
जवाबदेही और सुशासन का स्पष्ट प्रशासनिक संदेश
बैठक के अंत में DM उत्तरकाशी ने स्पष्ट कहा कि राजस्व वसूली, जन शिकायत निस्तारण, न्यायालयीन मामलों और प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता अब स्वीकार्य नहीं है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता सुशासन, पारदर्शिता और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली है।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र, एसडीएम देवानंद शर्मा, शालिनी नेगी, वरिष्ठ कोषाधिकारी आशीष कुमार, जिला खनन अधिकारी प्रदीप कुमार, एआरटीओ रत्नाकर सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी आशीष कुमार सहित तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
उत्तरकाशी में आयोजित यह समीक्षा बैठक स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जिला प्रशासन अब कड़े अनुशासन और जवाबदेही आधारित शासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। DM उत्तरकाशी के निर्देशों से यह संकेत मिलता है कि राजस्व व्यवस्था, जन शिकायत निस्तारण और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में अब परिणाम दिखाना अनिवार्य होगा। इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा और प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास मजबूत होगा।
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