ECI का सख्त संदेश: लापरवाही पर BLOs पर होगी कड़ी कार्रवाई, निलंबन से लेकर FIR तक के स्पष्ट निर्देश जारी

नई दिल्ली:
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने चुनावी व्यवस्था की जमीनी रीढ़ माने जाने वाले बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को लेकर एक अत्यंत सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ड्यूटी में नाकामी, लापरवाही, दुर्व्यवहार, कदाचार या आयोग के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी करने वाले BLOs के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई में कोई ढिलाई न बरती जाए

23 जनवरी 2026 को जारी यह आदेश मतदाता सूची की सटीकता, अखंडता और विश्वसनीयता को बनाए रखने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।


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📜 BLO की संवैधानिक स्थिति फिर स्पष्ट

आयोग ने अपने पत्र में पहले से जारी निर्देशों (दिनांक 04.10.2022) का हवाला देते हुए दोहराया है कि:

  • बूथ लेवल अधिकारी की नियुक्ति
    👉 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13B(2) के तहत
    👉 जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) की स्वीकृति से
    👉 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा की जाती है
  • BLO को धारा 13CC के अंतर्गत
    👉 भारत निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात माना जाता है

इसका सीधा अर्थ है कि BLO की जवाबदेही सीधे ECI के प्रति होती है।


Election Commission of India (ECI )issues guidelines on disciplinary action against BLOs BLO ECI GUIDLINE 2

🚨 किन मामलों में होगी कार्रवाई?

ECI ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित स्थितियों में BLO अनुशासनात्मक कार्रवाई अनिवार्य होगी:

  • कर्तव्य में लापरवाही या उपेक्षा
  • कदाचार या दुर्व्यवहार
  • आयोग के निर्देशों का जानबूझकर पालन न करना
  • RP Act, 1950 या मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 का उल्लंघन
  • कोई भी ऐसा कार्य या चूक जिससे
    👉 मतदाता सूची की सटीकता
    👉 अखंडता
    👉 विश्वसनीयता

पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो।


⚖️ ECI ने तय की तीन-स्तरीय सख्त प्रक्रिया

आयोग ने BLO अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की है:

🔹 1️⃣ DEO की भूमिका

  • दोषी BLO को तत्काल निलंबित किया जाएगा
  • संबंधित विभागीय अनुशासनात्मक प्राधिकारी को
    👉 विभागीय कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश
  • की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 6 माह के भीतर देना अनिवार्य
  • आपराधिक कदाचार के मामलों में
    👉 CEO की स्वीकृति से
    👉 RP Act, 1950 की धारा 32 के तहत
    👉 तत्काल FIR दर्ज कराई जा सकती है

🔹 2️⃣ CEO को स्वतः संज्ञान का अधिकार

  • CEO
    👉 स्वयं संज्ञान लेकर
    👉 या DEO/ERO की रिपोर्ट के आधार पर
    👉 निलंबन, विभागीय कार्रवाई या FIR के निर्देश दे सकते हैं
  • CEO का निर्णय DEO के माध्यम से लागू होगा

🔹 3️⃣ अंतिम निर्णय में CEO की अनिवार्य सहमति

  • किसी भी BLO अनुशासनात्मक कार्रवाई का निष्कर्ष
    👉 CEO की पूर्व सहमति के बिना मान्य नहीं होगा

📤 आयोग को अनिवार्य रिपोर्टिंग

ECI ने यह भी स्पष्ट किया है कि:

  • प्रत्येक मामले में की गई कार्रवाई की
    👉 सूचना आयोग को भेजना अनिवार्य होगा

यह प्रावधान BLO अनुशासनात्मक कार्रवाई को केवल कागजी औपचारिकता न बनने देने के उद्देश्य से किया गया है।


🗳️ मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर फोकस

चुनाव आयोग का मानना है कि:

  • BLO चुनावी तंत्र का फ्रंटलाइन अधिकारी होता है
  • उसकी लापरवाही सीधे
    👉 फर्जी मतदाता
    👉 गलत नाम विलोपन
    👉 पात्र मतदाताओं के नाम छूटने

जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।

इसलिए BLO अनुशासनात्मक कार्रवाई को अब कठोर प्रशासनिक निगरानी के दायरे में लाया गया है।


🧠 विशेषज्ञों की राय

चुनावी मामलों के जानकारों का कहना है कि यह आदेश:

  • आगामी चुनावों से पहले
    👉 मतदाता सूची सुधार
    👉 फील्ड-लेवल जवाबदेही
    👉 प्रशासनिक अनुशासन

को मजबूत करने की दिशा में निर्णायक कदम है।


🇮🇳 लोकतंत्र की नींव मजबूत करने की कोशिश

ECI का यह स्पष्ट रुख दर्शाता है कि:

“मतदाता सूची में त्रुटि लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है, और इसमें लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।”

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