हरिद्वार से उठा आध्यात्मिक और राष्ट्रीय संदेश
देवभूमि हरिद्वार गुरुवार को सिर्फ गायत्री परिवार शताब्दी समारोह के आयोजन का साक्षी नहीं बनी, बल्कि एक विचारधारा का केंद्र बन गई। अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष समारोह में देश की राजनीति, अध्यात्म और समाज—तीनों एक मंच पर दिखे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गायत्री परिवार शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया जिन जटिल समस्याओं से जूझ रही है, उनका समाधान भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों में पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता केवल इन मूल्यों को समझने और जीवन में उतारने की है।
आचार्य श्रीराम शर्मा का विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक
अमित शाह ने अपने गायत्री परिवार शताब्दी समारोह के संबोधन में आचार्य श्रीराम शर्मा के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सनातन धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा।
उन्होंने आचार्य जी के विचार
“व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और समाज से राष्ट्र निर्माण”
को आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
गृह मंत्री ने कहा कि आचार्य जी का संदेश—
“हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा”
आज भी मानव कल्याण का मूल मंत्र है और इसे हर व्यक्ति तक पहुंचाने की जरूरत है।
युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश: आत्म-सुधार ही सबसे बड़ी सेवा
गायत्री परिवार शताब्दी समारोह के संबोधन में अमित शाह ने युवाओं से सीधे संवाद करते हुए कहा कि आत्म-सुधार से बड़ी कोई सामाजिक सेवा नहीं हो सकती। यदि हर व्यक्ति खुद को बेहतर बनाने का संकल्प ले ले, तो समाज और देश अपने आप आगे बढ़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार की भूमि पर कदम रखते ही आध्यात्मिक अनुभूति होती है और गायत्री मंत्र व्यक्ति के भीतर सद्भाव, राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण की चेतना को जाग्रत करता है।
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दस वर्षों में बदली देश की सोच और कार्य-संस्कृति
गृह मंत्री ने बीते एक दशक का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की कार्य-संस्कृति और सोच में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। आज भारत को उसकी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और मूल्यों के कारण दुनिया में सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद और अरविंद घोष जैसे युगपुरुषों का स्मरण करते हुए कहा कि उनका विश्वास था—
भारत के उत्थान से ही मानवता का उत्थान संभव है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी: ‘वटवृक्ष की तरह है गायत्री परिवार’
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गायत्री परिवार को वटवृक्ष की संज्ञा देते हुए कहा कि यह संस्था समाज को शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना की छाया प्रदान कर रही है।
उन्होंने गायत्री परिवार शताब्दी समारोह में कहा कि आज भारत अपनी प्राचीन संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को नए रूप में फिर से स्थापित कर रहा है और सनातन संस्कृति का यह संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचे—इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
डॉ. चिन्मय पांड्या: समाज में रहकर ही होता है मानव कल्याण
अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से डॉ. चिन्मय पांड्या ने कहा कि संस्थान का मूल दर्शन समाज से अलग होना नहीं, बल्कि समाज में रहकर मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान के कार्य करना है।
उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार वेद, उपनिषद और गीता से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक तकनीक को अपनाकर शिक्षा, प्रशिक्षण और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए राष्ट्र धर्म की रक्षा आवश्यक है।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु, आयोजन को मिला वैश्विक स्वरूप
गायत्री परिवार शताब्दी समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह, विधायक मदन कौशिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में गायत्री साधक और श्रद्धालु इस अवसर पर पहुंचे, जिससे कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय आयाम मिला।
जब अध्यात्म, समाज और राष्ट्र एक दिशा में चलें
हरिद्वार में आयोजित गायत्री परिवार शताब्दी समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि अध्यात्म और राष्ट्र निर्माण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
गृह मंत्री अमित शाह का संदेश साफ था—
अगर दुनिया को दिशा दिखानी है, तो भारत को अपनी परंपराओं और मूल्यों पर फिर से भरोसा करना होगा।
यही इस आयोजन की सबसे बड़ी सीख और उपलब्धि रही।
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