मकर संक्रांति 2026: नरेंद्र मोदी ने दी उत्तरायण की बधाई, गुजरात और जयपुर में पतंगों से सजा आसमान

नई दिल्ली/अहमदाबाद/जयपुर।
नववर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही देशभर में पर्वों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और उत्तरायण का पर्व पूरे भारत में श्रद्धा, परंपरा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को उत्तरायण और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। नरेंद्र मोदी के संदेश के बाद गुजरात से लेकर राजस्थान की राजधानी जयपुर तक उत्सव का माहौल देखने को मिला और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया।

नरेंद्र मोदी का संदेश: नई ऊर्जा और सकारात्मकता का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उड़ती पतंगों की तस्वीरें साझा करते हुए सभी नागरिकों के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि सूर्य उपासना का यह पर्व जीवन में नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मक दृष्टिकोण लेकर आता है तथा समाज में सामूहिक समरसता को मजबूत करता है।

आस्था, परंपरा और कृषि संस्कृति का पर्व

मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति और कृषि परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ खरमास समाप्त होता है और शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य देव की पूजा, दान-पुण्य और तिल-गुड़ व खिचड़ी का विशेष महत्व होता है। तिल और गुड़ की मिठास आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।

मकर संक्रांति पर इस विधि से करें पूजा-पाठ

गुजरात में ‘काइपो छे’ और अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव

उत्तरायण का सबसे भव्य और रंगीन स्वरूप गुजरात में देखने को मिल रहा है। अहमदाबाद में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव ने पूरे शहर को उत्सव की राजधानी में बदल दिया है। छतों पर परिवारों की मौजूदगी, युवाओं की पतंगबाजी, डीजे की धुनों पर गूंजता संगीत और हर दिशा में सुनाई देता “काइपो छे” का नारा आसमान को जीवंत बना रहा है।
पतंगबाजी के साथ-साथ गुजरात का पारंपरिक व्यंजन उंधियू, जलेबी और गन्ने का रस इस पर्व के स्वाद को और समृद्ध कर रहा है।

जयपुर में भी मकर संक्रांति की धूम

गुजरात के साथ-साथ राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी मकर संक्रांति का खास उत्साह देखने को मिला। गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक हवेलियों और आधुनिक इमारतों की छतों से सुबह से ही पतंगें उड़ती नजर आईं। जयपुर का आसमान रंगीन पतंगों से सजा रहा, वहीं घरों में तिल-गुड़ के लड्डू, घेवर और खिचड़ी बनाकर पर्व को पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। परिवारों और मित्र समूहों ने छतों पर एकत्र होकर उत्सव का आनंद लिया।

राजनीति और खेल जगत पर भी चढ़ा पर्व का रंग

मकर संक्रांति का उत्साह केवल आम जनजीवन तक सीमित नहीं रहा। राजनीति और खेल जगत में भी इस पर्व की झलक दिखाई दी। भाजपा नेता संबित पात्रा सहित कई नेताओं ने लोगों को शुभकामनाएं दीं। वहीं आईपीएल टीम गुजरात टाइटंस ने भी अपने प्रशंसकों के साथ उत्तरायण की खुशियां साझा कीं।
यह पर्व एक बार फिर यह संदेश देता है कि भारतीय त्योहार समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में बांधते हैं।

नई शुरुआत और प्रकाश का प्रतीक

सूर्य के उत्तरायण होने के साथ मकर संक्रांति अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक मानी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश के साथ यह पर्व देशवासियों के लिए नई शुरुआत, आत्मविश्वास और सामूहिक प्रगति का संकल्प बनकर सामने आया है। परंपरा और आधुनिकता के इस सुंदर संगम ने एक बार फिर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की मजबूती को दर्शाया है।

 

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