नई दिल्ली। भारत की शासन व्यवस्था एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। मकर संक्रांति के अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अपने औपनिवेशिक युग के ठिकाने साउथ ब्लॉक को छोड़कर नए सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है।
यह कदम न केवल भौतिक स्थानांतरण है, बल्कि भारत की कार्यशैली, प्राथमिकताओं और प्रशासनिक सोच में बदलाव का स्पष्ट संकेत भी है।
Historic Shift for India’s Governance: क्यों खास है यह बदलाव
इस फैसले के साथ भारत के प्रशासनिक इतिहास का एक 78 साल पुराना अध्याय समाप्त हो रहा है। सरकार के अनुसार, यह बदलाव तीन स्तरों पर बेहद अहम है:
- औपनिवेशिक साउथ ब्लॉक से विदाई:
PMO का साउथ ब्लॉक से बाहर जाना, ब्रिटिशकालीन प्रशासनिक ढांचे से आगे बढ़ने का प्रतीक है। - सेवा तीर्थ में एकीकृत शासन मॉडल:
नए PMO परिसर में प्रमुख मंत्रालयों को एक ही उद्देश्य-निर्मित हब में लाया गया है, जिससे नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज़ होगी। - आधुनिक और दक्ष प्रशासन का संदेश:
यह कदम दिखाता है कि भारत अब प्रतीकात्मक विरासत से आगे बढ़कर समकालीन, टेक-ड्रिवन और परिणाम-केंद्रित शासन को प्राथमिकता दे रहा है।
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नरेंद्र मोदी सरकार का बड़ा प्रशासनिक निर्णय
अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा, जो आज़ादी के बाद से सत्ता का प्रमुख केंद्र था। लेकिन बदलते समय के साथ प्रशासनिक आवश्यकताएँ भी बदली हैं। नरेंद्र मोदी सरकार का मानना है कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना प्रभावी शासन संभव नहीं।
इसी सोच के तहत PMO को सेवा तीर्थ परिसर में शिफ्ट किया जा रहा है, जो सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम हिस्सा है।
सेवा तीर्थ परिसर: नए भारत का प्रशासनिक केंद्र
सेवा तीर्थ परिसर को विशेष रूप से 21वीं सदी के शासन मॉडल को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यहाँ:
- एक ही परिसर में प्रमुख मंत्रालय
- डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा
- बेहतर समन्वय और तेज़ निर्णय क्षमता
- उच्च स्तरीय सुरक्षा और आधुनिक सुविधाएँ
सरकार का दावा है कि इससे प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता दोनों में बढ़ोतरी होगी।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का भविष्य क्या होगा
PMO और अन्य कार्यालयों के स्थानांतरण के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को खाली किया जाएगा। इसके बाद इन ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ में बदला जाएगा।
यह संग्रहालय:
- भारत के प्रशासनिक और लोकतांत्रिक सफर को दर्शाएगा
- औपनिवेशिक दौर से आधुनिक भारत तक की कहानी बताएगा
- आम जनता को सत्ता के इतिहास से सीधे जोड़ेगा
यह पहल विरासत संरक्षण और जनभागीदारी—दोनों को साथ लेकर चलने का उदाहरण मानी जा रही है।
सेंट्रल विस्टा परियोजना और नरेंद्र मोदी का विज़न
सेंट्रल विस्टा परियोजना नरेंद्र मोदी सरकार के दीर्घकालिक प्रशासनिक विज़न का आधार है। नया संसद भवन, आधुनिक मंत्रालय परिसर और अब सेवा तीर्थ—ये सभी कदम शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और भविष्य-तैयार बनाने की दिशा में उठाए गए हैं।
नरेंद्र मोदी के फैसले का व्यापक संकेत
यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी है—
भारत अब अपनी शासन व्यवस्था को औपनिवेशिक ढांचे से निकालकर आधुनिक, कुशल और एकीकृत मॉडल की ओर ले जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय का सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरण नरेंद्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला है। यह कदम जहां 78 साल पुराने अध्याय को समाप्त करता है, वहीं भारत के शासन में एक नए, आधुनिक और दक्ष युग की शुरुआत भी करता है।
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