नई दिल्ली: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का ताजा बयान सुर्खियों में है। उन्होंने कहा है कि “PoK के लोग जल्द ही खुद भारत में शामिल होने की मांग करेंगे, क्योंकि उन्हें अब समझ में आ रहा है कि उनका असली विकास भारत के साथ ही संभव है।”
PoK में उठ रही भारत से जुड़ने की लहर?
राजनाथ सिंह ने यह बयान देकर एक बड़ा संदेश दिया है कि PoK में पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है और लोग अब भारत के साथ एकीकरण की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे शोषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने PoK के निवासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
सेना प्रमुख का इशारा – जो आदेश मिलेगा, हम उसके लिए तैयार
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी इस विषय पर संकेत देते हुए कहा है, “जो भी आदेश मुझे मिलेगा, मैं उसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं।” यह बयान भारत की सशस्त्र सेनाओं की तत्परता को दर्शाता है और संकेत देता है कि यदि समय आता है, तो भारत इस पर ठोस कदम उठा सकता है।
राजनाथ सिंह – “पाकिस्तान को मंजूरी देने की जरूरत नहीं होगी!”
रक्षा मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि “PoK के लोग पाकिस्तान की सहमति के बिना ही भारत में शामिल होना चाहेंगे। पाकिस्तान को मजबूर होकर इसे स्वीकार करना पड़ेगा।” इसका मतलब साफ है कि पाकिस्तान अपनी कमजोर होती स्थिति के कारण PoK को रोकने में सक्षम नहीं होगा और वहां की जनता का फैसला ही आखिरी होगा।
पाकिस्तान में हड़कंप, भारत की कूटनीति फिर भारी?
राजनाथ सिंह के इस बयान से पाकिस्तान में हलचल मचनी तय है। पहले ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है, आंतरिक राजनीति अस्थिर है और सेना तथा सरकार के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति में यदि PoK के लोग भारत में शामिल होने की मांग करते हैं, तो पाकिस्तान के लिए यह सबसे बड़ा झटका होगा।
क्या भारत PoK को वापस लेने के लिए कोई रणनीति बना रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कूटनीतिक और सामरिक दोनों स्तरों पर PoK को लेकर सक्रिय है। बीते वर्षों में सरकार ने कई मंचों पर स्पष्ट कर दिया है कि PoK भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसे वापस लेना हमारा संकल्प है।
अगला कदम क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत इस स्थिति को कैसे हैंडल करेगा?
- क्या PoK में भारत समर्थक आंदोलनों को और बल मिलेगा?
- क्या पाकिस्तान खुद इस मसले पर बैकफुट पर जाएगा?
- क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के रुख का समर्थन करेगा?
फिलहाल, राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख के बयानों से साफ है कि PoK की जनता के मन में बदलाव की लहर चल रही है और भारत इस स्थिति को पूरी तरह से भांप रहा है। यदि आने वाले समय में PoK के लोग भारत में शामिल होने के लिए खुलकर सामने आते हैं, तो यह ऐतिहासिक घटनाक्रम होगा जो पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति को बदलकर रख देगा!
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