जिसे बार-बार मिटाने की कोशिश हुई…” RSS की ‘अनसुनी फाइल’ अब सिनेमाघरों में खुलेगी! 19 फरवरी को आ रही फिल्म ‘शतक’ ने टीज़र से मचाया भूचाल

[News Desk | Headlinesip Special Report]

भारत के सबसे चर्चित और सबसे ज़्यादा बहस में रहने वाले संगठन—राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)—के 100 साल के इतिहास पर आधारित फिल्म ‘शतक’ (Shatak) का टीज़र रिलीज होते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है।
सिर्फ 75 सेकंड के इस टीज़र ने वो सवाल फिर से ज़िंदा कर दिए हैं, जिन्हें दशकों से दबाने, टालने या एकतरफा तरीके से पेश करने के आरोप लगते रहे हैं।

“यह एक विचार की कहानी है… जिसे बार-बार मिटाने की कोशिश की गई।”
टीज़र की यह लाइन ही फिल्म के मिज़ाज और इसके संभावित प्रभाव को साफ कर देती है।


🔥 RSS पर पहली बड़ी सिनेमाई दस्तावेज़?

फिल्म ‘शतक’ खुद को महज़ एक बायोपिक नहीं, बल्कि 1925 से 2025 तक के वैचारिक सफर का सिनेमाई दस्तावेज़ बताती है।
टीज़र की शुरुआत डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के संघर्ष और 27 सितंबर 1925 को संघ की स्थापना के दृश्यों से होती है।

पुराने दौर की फुटेज-स्टाइल सिनेमैटोग्राफी, भारी बैकग्राउंड स्कोर और सीमित संवाद—ये सब मिलकर एक गंभीर, विचारोत्तेजक माहौल बनाते हैं।

RSS पर बनी फिल्म शतक का टीज़र – डॉ. हेडगेवार और संघ स्थापना के दृश्य


🎬 कौन बना रहा है ‘शतक’?

  • निर्देशक: आशीष मल्ल
  • निर्माता: वीर कपूर
  • मुख्य कलाकार: कबीर सदानंद (महत्वपूर्ण भूमिका में)

अभिनेता कबीर सदानंद फिल्म को “राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से प्रेरित” बताते हैं, जबकि निर्देशक आशीष मल्ल का दावा है कि फिल्म तथ्यों, दस्तावेज़ों और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है—ना कि सिर्फ भावनात्मक अपील पर।


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⚖️ सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा

टीज़र आते ही #ShatakTeaser और #RSSMovie जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। प्रतिक्रियाएं साफ तौर पर दो धड़ों में बंटी दिखीं:

✔️ समर्थकों की राय

  • “अब वो सच सामने आएगा जो इतिहास की किताबों में नहीं है।”
  • “RSS को हमेशा गलत तरीके से पेश किया गया, यह फिल्म मिथक तोड़ेगी।”
  • “100 साल के संगठन की कहानी आखिर बड़े पर्दे पर आ ही गई।”

❌ आलोचकों का आरोप

  • “यह एकतरफा नैरेटिव है।”
  • “फिल्म विचारधारात्मक प्रोपेगेंडा को बढ़ावा दे सकती है।”
  • “चुनिंदा तथ्यों से इतिहास गढ़ा जाएगा।”

🎥 ट्रेड एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरन आदर्श ने ‘शतक’ को

“एक गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्म”
बताया है।

उनके मुताबिक, यह फिल्म मास ऑडियंस से ज़्यादा वैचारिक दर्शकों को आकर्षित कर सकती है, लेकिन कंटेंट की वजह से बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में जरूर रहेगी।


🗓️ 19 फरवरी: क्यों है ये तारीख खास?

फिल्म 19 फरवरी को रिलीज हो रही है—और यह तारीख यूं ही नहीं चुनी गई।
RSS के शताब्दी वर्ष (Centenary Year) में आ रही यह फिल्म संगठन के समर्थकों के लिए भावनात्मक, जबकि आलोचकों के लिए वैचारिक बहस का नया केंद्र बन सकती है।

सवाल बड़ा है:

  • क्या यह फिल्म इतिहास के दबे हुए पन्ने खोलेगी?
  • या फिर सिनेमाघरों में नया वैचारिक टकराव देखने को मिलेगा?

‘शतक’ का टीज़र साफ संकेत देता है कि फिल्म सॉफ्ट एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि हार्ड आइडियोलॉजिकल सिनेमा है।
ऐसी फिल्मों में बॉक्स ऑफिस से ज़्यादा अहम होता है डिस्कोर्स—और इस मोर्चे पर ‘शतक’ पहले दिन से सफल दिख रही है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि फिल्म

  • तथ्यों और भावनाओं के बीच संतुलन बना पाती है या नहीं
  • और क्या यह इतिहास को समझने का नया नजरिया दे पाएगी

फिल्म ‘शतक’ ऐसे दौर में रिलीज हो रही है, जब देश में इतिहास, विचारधारा और पहचान को लेकर बहस अपने चरम पर है। ऐसे में यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं, बल्कि दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने वाला दस्तावेज़ बन सकती है। RSS को लेकर बनी धारणाएं, आरोप और समर्थन—सब कुछ इस फिल्म के जरिए नए सिरे से परखा जाएगा। यही वजह है कि ‘शतक’ को लेकर उत्सुकता भी है और आशंकाएं भी, और यही इसे खास बनाती है।

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